घटिया प्लास्टिक से बनती हैं फैंसी लाइटें, वातावरण को कार्बन मुक्त रखते हैं देशी दीये

पोस्ट पसंद आये तो लाइक जरुर करे ?

जोधपुर. दिवाली पर घरों में घी या तेल के दीपक ही लगाने चाहिए। ये बिजली की फैंसी लाइटों से अधिक सुरक्षित हैं। दीये पर्यावरण मित्र होने के साथ स्वास्थ्य को हानि नहीं पहुंचाते, जबकि फैंसी लाइट्स से होने वाली रोशनी महंगी होने के साथ स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचाती है। घी व तेल के दीये जलाने से वातावरण कार्बन मुक्त होता है। दीयों से उन इलाकों को भी रोशन किया जा सकता है जहां बिजली नहीं है। यह जरूर है कि घटिया तेल से दिये जलाने पर कुछ मात्रा में कार्बन मोनोक्साइड उत्सर्जित होती है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। फैंसी लाइट्स का प्लास्टिक गैर प्रमाणीकृत होता है। इसे छूने से भी त्वचा की एलर्जी हो सकती है। ये जरूर है कि इन लाइटों पर दीयों की तुलना में कम खर्च होता है। एक बार लाइटें लेने पर तीन-चार साल तक चल जाती हैं। लेकिन खराब होने के बाद इन्हें यहां-वहां फैंक दिया जाता है। जिससे पॉली प्रोपाइलिन सहित कई रसायन उत्सर्जित होते हैं जो स्वास्थ्य पर बुरा असर डालते हैं। इन लाइट्स से कार्बन डाइ ऑक्साइड जैसी गैसें भी निकलती है।

दीये जलाएं

फैंसी लाइट्स की तुलना में दीये अधिक सुरक्षित हैं। इससे पर्यावरण व स्वास्थ्य को नुकसान नहीं होता। घरों को दीयों से ही रोशन करनी चाहिए।
डॉ. राकेश शर्मा, रसायन विज्ञान विभाग, आइआइटी, जोधपुर



from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2D93uvt
Share on Google Plus

About Atul

This is a short description in the author block about the author. You edit it by entering text in the "Biographical Info" field in the user admin panel.

0 comments:

Post a Comment