जोधपुर. मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर स्कूलों में दूसरी कक्षा तक के बच्चों को होमवर्क नहीं देने के मामले का जोधपुर में अभिभावकों ने स्वागत किया है। अभिभावकों का कहना है कि इससे स्कूलों को अपनी परफोर्मेंस का पता लगेगा। ज्यादातर विद्यालयों के टीचर्स बच्चों के पढ़ाई नहीं करने का सारा दोष अभिभावकों पर थोप देते हैं। अब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। कई अभिभावकों ने माना कि बैग का वजन घटाने से बच्चों को राहत मिली, लेकिन स्कूल में पढ़ाई के बावजूद बच्चे ट्यूशन जा रहे हैं, ये चिंता का विषय है। कई विद्यालयों के टीचर्स बच्चों को घर बुलाकर अतिरिक्त फीस लेते हैं। जबकि सरकार को स्कूल टीचर के ट्यूशन पर पाबंदी लगानी चाहिए।
बच्चों को मिली राहत
कई स्कूल चाहते हैं कि साढ़े तीन साल का विद्यार्थी 100 तक गिनती लिखना सीख जाए। क्या ऐसा मुनाबिस है। पैरेंट्स- टीचर मीटिंग में अभिभावकों से कहा जाता है कि बच्चे को घर पर मेहनत कराएं। जब बच्चों को हमें ही पढ़ाना है तो स्कूल मनमानी फीस किस बात की लेते हैं।
- राजेश व्यास, अभिभावक
स्वागत योग्य पहल
ज्यादातर स्कूल में बच्चों को ढेर सारा होमवर्क दिया जाता है। बच्चों से सारी किताबें मंगवाई जाती है। इस कारण बैग का बोझ बढ़ जाता है। एचआरडी की ये पहले स्वागत योग्य है। सरकार के निर्देश के बाद विद्यार्थियों को राहत मिलेगी या नहीं, इसकी सुध प्रशासन को लेनी चाहिए। क्योंकि निजी स्कूल किसी की नहीं सुनते।
-रेखा मूथा, अभिभावक
पैरेंट्स के पास फीडबैक पहुंचना चाहिए
ऐसा होमवर्क न दिया जाए, जिसे बच्चे कर ही नहीं सकें और अभिभावक को शामिल होना पड़े। लेकिन ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे अभिभावक को यह पता चल सके कि बच्चे ने क्लास में क्या काम किया, रीडिंग व एक्सप्रेशन कैसे हैं। ताकि पैरेंट्स के पास फीडबेक पहुंचे कि क्लास में क्या नया किया जा रहा है।
- निहारिका चौपड़ा, प्रिंसिपल, निजी स्कूल
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