खारिया मीठापुर (जोधपुर). यूं तो राज्य सरकार स्वच्छता को लेकर पानी की तरह पैसा बहा रही है। स्वच्छता का संदेश लोगों तक पहुंचे इसके लिए कई विभागों को भारी भरकम बजट भी दिया जा रहा है।
देश के प्रधानमंत्री भारत स्वच्छता अभियान को लेकर गंभीर है व इसके प्रचार-प्रसार के लिए विज्ञापन, नुक्कड़ नाटक, बैनर, संगोष्ठियां सहित विभिन्न प्रकार से पैसा खर्च कर लोगों को स्वच्छता के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके उलट राज्य का आयुर्वेद विभाग अपवाद है। स्वच्छता की मद में करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद औषधालय पर्याप्त बजट को तरस रहे हैं। औषधालयों की साफ -सफाई के लिए सरकार महज 125 रुपए प्रतिमाह का बजट दे रही है।
जिले मे 124 औषधालय संचालित हैं। इनमें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी नहीं है। बजट भी इतना सा मिलता है जिससे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मिलना तो दूर सफाई के संसाधन भी नहीं खरीद सकते। मजबूरन चिकित्सा कर्मचारियों को प्रतिमाह अपनी जेब ढीली करके सफ ाई करवानी पड़ रही है। या फि र स्वयं को सफाई करनी पड़ रही है। घाणामगरा, हरियाडा, जैतीवास औषधालय में कम्पाउंडर का पद लम्बे समय से रिक्त पड़ा है।
आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. गोपालनारायण शर्मा ने बताया कि जोधपुर जिले में कुल 16 ब्लॉक हैं जिनमें 124 सरकारी आयुर्वेद औषधालय है और तीन चिकित्सालय है। बिलाड़ा ब्लॉक में कुल आठ घाणामगरा, बिलाड़ा, हरियाड़ा, हरियाढाणा, रणसी गांव, जैतीवास, कालाऊना व रावर गांव मे आयुर्वेद औषधालय है।
इन्होंने कहा
औषधालयों की सफाई के लिए सरकार से महज 125 रुपए का बजट प्रतिमाह मिलता है। ऐसे में कर्मचारियों को अपने स्तर पर ही सफाई करवानी पड़ती है।
-सतानंद शर्मा, उपनिदेशक आयुर्वेद विभाग जोधपुर
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