अमित दवे/जोधपुर. अमरीकन हार्डवुड एक्सपोर्ट काउंसिल ने जीएसटी, शीशम के उत्पादों पर प्रतिबंध, रिफण्ड सहित कई समस्याओं से जूझ रहे जोधपुर के हैण्डीक्राफ्ट निर्यात उद्योग को दीपावली की सौगात दी है। अब जोधपुर में अमरीकन लकड़ी से बने हैण्डीक्राफ्ट उत्पादों के निर्यात के लिए निर्यातकों को लकड़ी का वैधता सर्टिफिकेट नहीं लेना होगा। यहां उपयोग मे ली जाने वाली लकड़ी की गुणवत्ता व लकड़ी की मांग की रिपोर्ट अमरीकी सरकार को प्रस्तुत की जाएगी।
अमरीकी सरकार के आदेश पर जोधपुर आए काउंसिल के रोड्रिक व आर विल्सन ने मंगलवार को यहां की हैण्डीक्राफ्ट इकाइयों का अवलोकन कर निर्यातकों से जानकारी ली। दोनों ने करीब 20 निर्यातकों से मुलाकात की और जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन की ओर से निर्यातकों को दिए गए फ्री अमरीकन ट्यूलिप वुड के सेम्पल का अवलोकन करने के साथ अमरीकी लकड़ी से बनाए गए उत्पादों की जानकरी ली। उन्होंने यूएस काउंसलेट व हार्डवुड काउंसल की ओर से जोधपुर के निर्यातकों को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।
प्रतिदिन 2 हजार टन लकड़ी के उत्पादों का निर्यात
जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. भरत दिनेश ने बताया कि जोधपुर से प्रतिदिन 2 हजार टन लकडी के हैण्डीक्राफ्ट निर्यात होता है। लकड़ी की कमी के कारण लकड़ी के भाव दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे है। ऐसे में अमरीकन ट्यूलिप लकड़ी पर जोधपुर के हैण्डीक्राफ्ट फर्नीचर का काम किया जा सकता है । उन्होंने बताया कि अमरीका की अकासिया, अमरीकन रेड ओक, ब्लेक वॉलनट, हार्ड मेपल आदि लकड़ी पर जोधपुरी हैण्डीक्राफ्ट की कारीगरी का नजारा देखने को मिलेगा । एसोसिएशन सचिव मनीष पुरोहित ने यूएस काउंसलेट दल का स्वागत किया और बताया कि अमरीकन लकड़ी की किस्म यहां की कुछ लकडिय़ों से मिलती-जुलती है व इन पर जोधपुर के हैण्डीक्राफ्ट्स को बनाया जा सकता है ।
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