दरअसल इन दिनों दीवाली की सीजन के चलते कुरजां के विचरण क्षेत्रों में पटाखों के धमाकों से पक्षी चुग्गाघर में आने में काफी देरी कर रहे है। गौरतलब है कि कुरजां नमक उत्पादन क्षेत्र में रात्रि विश्राम के बाद सुबह करीब ६.३० बजे खीचन तो पंहुच जाती है, लेकिन इन दिनों ८.३० के बाद ही चुग्गाघर में प्रवेश कर रही है। जबकि १०-१५ दिन पूर्व कुरजां ७.३० बजे तक चुग्गा लेने आ जाती थी। गुरुवार सुबह भी काफी दूरी से भी पटाखों से हुए धमाकों की बार-बार की आवाज आने के कारण पक्षी बार-बार चुग्गाघर से उड़ते रहे।
कुरजां का सुबह का समय-
तारीख खीचन पंहुचना चुग्गा लेना
२२.१०.१८ ६.३६ ८.२० बजे
२३.१०.१८ ६.२६ ८.२९ बजे
२४.१०.१८ ६.२६ ८.१३ बजे
२५.१०.१८ ६.३२ ८.१६ बजे
२६.१०.१८ ६.३६ ९.३४ बजे
२७.१०.१८ ६.३२ ८.१५ बजे
२८.१०.१८ ६.३१ ९.५२ बजे
२९.१०.१८ ६.२९ ७.५६ बजे
३०.१०.१८ ६.४२ ८.१३ बजे
३१.१०.१८ ६.४० ८.२७ बजे
०१.११.१८ ६.३० ९.२७ बजे
एक साथ उड़ जाते हैं हजारों पक्षी-
खीचन में शीतकालीन प्रवास पर आए कुरजां पक्षियों की संख्या इन दिनों करीब ६-७ हजार के आस-पास है। इन दिनों काफी देरी से कुरजां के चुग्गाघर में आने के बाद काफी दूर भी पटाखों की आवाज आ जाती है, तो हजारों पक्षी एक साथ आकर्षक नजारे के साथ उड़ जाते हैं। साथ ही कई बार चुग्गाघर के पास की सडक़ से गुजरने वाले वाहनों की अचानक आवाज से भी पक्षी उड़ जाते हैं।
पक्षियों होता है एैसा व्यवहार-
अगर स्थानीय क्षेत्र में पक्षी किसी भी खतरे को महसूस कर लेते है, तो पक्षी इस घटनाओं से सीखकर अपना व्यवहार बदल देते हैं। संभवतया यह उसका ही नजीता है कि इन दिनों पटाखों की आवाज से पक्षियों ने अपना चुग्गा लेने के समय में देरी कर दी है।
डॉ. हेमसिंह गहलोत, सहायक आचार्य, प्राणि विज्ञान, जेएनवीयू, जोधपुर
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2qrgdlG
0 comments:
Post a Comment