दो सप्ताह में शुरू करें वाणिज्यिक अदालतें : हाईकोर्ट

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जोधपुर

राजस्थान उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत लोढा और दिनेश मेहता की खण्डपीठ ने राज्य सरकार, हाइकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल व सम्बन्धित जिला कलक्टर को दो सप्ताह में प्रदेश में वाणिज्यिक अदालतें शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

जबकि जोधपुर जिला कलक्टर को ग्रामीण ट्रेजरी स्थित ओटीएस भवन खाली होने तक पंद्रह दिन में वैकल्पिक व्यवस्था करने और चोखा मेें ओटीएस की निर्माणाधीन बिल्डिंग को चुनावी आचार संहिता की परवाह किए बिना टेंडर जारी कर तुरंत निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

निर्माण पूरा होते ही ग्रामीण ट्रेजरी स्थित ओटीएस का भवन खाली किया जाएगा और पहली मंजिल पर स्थित रजिस्ट्री ऑफिस को ग्राउंड फ्लोर पर शिफ्ट कर पहली मंजिल में वाणिज्यिक अदालत खोलने और सभी निर्देशों की पालना रिपोर्ट आगामी 3 जनवरी से पहले न्यायालय के समक्ष पेश करने के आदेश दिए हैं।

यह निर्देश गुरुवार को राजस्थान हाइकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन की ओर से दायर जनहित याचिका की सुनवाई में दिए गए।

इससे पूर्व वरिष्ठ अधिवक्ता एमआर सिंघवी व अधिवक्ता सुनील भण्डारी ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से 3 लाख रुपए से ज्यादा के प्रकरण वाणिज्यिक न्यायालय के वास्ते कर दिए हैं और राज्य सरकार ने 5 लाख रुपए से अधिक के मामलों की सम्भागीय स्तर पर सुनवाई का आदेश किया है, लेकिन वाणिज्यिक न्यायालयों में न्यायाधीश नियुक्त होने के बावजूद जयपुर से पत्रावलियां हस्तांतरित नहीं की जा रही और न ही अस्थायी या स्थाई भवन देखा जा रहा है।

हाइकोर्ट की ओर से कहा गया कि पत्रावलियां उनकी निर्धारित पेशी पर ही वापस भेजी जाएंगी जबकि राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि नए भवन के निर्माण तक जोधपुर में ग्रामीण कोषालय भवन की दूसरी मंजिल पर ओटीएस व रजिस्ट्री कार्यालय की जगह वाणिज्यिक न्यायालय प्रारंभ कर दिया जाएगा।

 

दो सप्ताह में पत्रावलियां हस्तांतरित करें

खंडपीठ ने कहा कि सम्भागीय स्तर पर प्रारंभ हो चुके वाणिज्यिक न्यायालयों से सम्बन्धित पत्रावलियां 2 सप्ताह से पूर्व हस्तांतरित की जाएं। सभी संबंधित जिला कलक्टर नए भवन बनाए जाने तक राज्य सरकार, हाइकोर्ट व सम्बन्धित जिला जज से सलाह कर अस्थायी भवन देखें और स्थाई जगह की तलाश करें।

पत्रावलियां हस्तांतरित होने पर शपथ पत्र पेश कर बताया जाए कि वाणिज्यिक न्यायालय से सम्बंधित कितने प्रकरण विचाराधीन हैं ताकि जिला स्तर पर और न्यायालय खोले जाने पर विचार किया जा सके।

रजिस्ट्रार जनरल को यह सुनिश्चित करने को कहा कि वाणिज्यिक न्यायालय अलग भवन में पूर्णतया सुसज्जित व सभी सुविधाओं से परिपूर्ण हों और इसके लिए वास्ते राज्य सरकार को प्रति वाणिज्यिक न्यायालय के लिए बजट की अनुशंसा हर हाल में 2 माह के भीतर की जाए।

अस्थायी भवन के लिए हाइकोर्ट को निर्देश दिया कि समुचित बजट के लिए राज्य सरकार को 4 सप्ताह में अनुशंषा करे और राज्य सरकार 2 सप्ताह में इस पर अपनी स्वीकृति प्रदान करे।

 



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