जोधपुर. विधानसभा चुनाव में मतदाताओं को रिझाने के लिए शराब की बंदरबांट की आशंका पर चुनाव आयोग के निर्देश पर आबकारी महकमा अलर्ट हो गया है। किसी भी ठेके से औसत बिक्री से तीस प्रतिशत अधिक शराब बिकने पर वह ठेका संदेह के दायरे आ जाएगा। इसके साथ ही पर्चियों से शराब की बिक्री पर भी नजर रखी जाएगी।
थिनर का उपयोग करने वाले पाबंद
शराब बनाने में ईथाइल एल्कोहल का उपयोग होता है। जबकि उसके जैसे नजर आने वाले मिथाइल एल्कोहल का प्रयोग औद्योगिक क्षेत्र में होता है। मिथाइल एल्कॉहल स्वास्थ्य के लिए घातक है। इसे पीने से आंखों की रोशनी जा सकती है और मौत भी हो सकती है। इसे देखते हुए आबकारी विभाग ने बासनी औद्योगिक क्षेत्र में बैठक लेकर थिनर का उपयोग करने वाली इकाइयों को पाबंद किया है।
शराब निर्माता फैक्ट्रियों पर नजर
शहर के ठेकों पर शराब की सप्लाई करने वाली प्रमुख उत्पादक गंगानगर शूगर मिल व आनएन प्रोडक्ट हैं। यहां बनने वाली शराब के स्टॉक से लेकर फैक्ट्री से निकलने तक पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की नजर में कर दी गई है। विभाग के अधिकारी ऑफिस में बैठे-बैठे मोबाइल के माध्यम से उत्पादक पर नजर रखे हुए है।
इनका कहना है
‘चुनाव को देखते हुए आबकारी महकमा सतर्क है। बासनी क्षेत्र में थिनर का उपयोग करने वालों को पाबंद किया गया है। किसी भी ठेके पर औसत से तीस प्रतिशत अधिक शराब बिकने पर निगरानी रखी जाएगी। शराब का स्टॉक करने वालों पर भी कार्रवाई की जाएगी।’
रिछपाल सिंह बुरडक़, जिला आबकारी अधिकारी जोधपुर।
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