23 घंटे के सफर में एक भी आरक्षित कोच नहीं, यात्री परेशान

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जोधपुर।

हिसार से जोधपुर व जोधपुर से पालनपुर के बीच संचालित होने वाली डेमू 23 घंटे में 822 किमी का सफ र तय करती है। मगर डेमू ट्रेन में एक भी आरक्षित कोच नहीं है और ना ही सोने के लिए सीट। यात्रियों को बैठकर व खड़े रहकर यात्रा करनी पड़ती है। की विवशता रहती है। ऐसे में 89 स्टेशनों के यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लंबी दूरी रैक का संचालन करने से आए दिन इंजन हांफ कर जवाब देने के कारण ट्रेन को देरी का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति इसी डेमू टे्रन की नहीं, बल्कि जोधपुर रेल मण्डल में संचालित होने वाली अधिकांश डेमू ट्रेनों की है। छोटे-छोटे स्टेशनों पर रूककर तुरन्त रफ्तार पकडऩे वाली डेमू ट्रेन जोधपुर रेल मण्डल को करीब 5 वर्ष पूर्व मिली थी। उस समय यात्रियों में आस जगी थी कि उपनगरीय स्टेशनों के बीच चलने वाली डेमू ट्रेनें लंबी दूरी को कम समय में तय कर जल्दी मंजिल तक पहुंचाएगी। रेलवे द्वारा डेमू रेक में लंबी दूरी की पैसेंजर ट्रेनों में काम में लेने के कारण परेशानी हो रही है। आए दिन यह डेमू ट्रेनें किन्हीं तकनीकी खामियों के कारण बीच रास्ते अटक जाती है। जिसका खमियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। 20 सितम्बर से 20 अक्टूबर तक तकनीकी खराबी, पर्याप्त मेंटिनेंस नहीं होने, व्हील भी खराब होने सहित अन्य कारणों से करीब 15 से अधिक बार डेमू का इंजन फेल हुआ है।

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एेसे तय करती है 833 किमी का सफर

जोधपुर मंडल में ट्रेन संख्या 74835 हिसार से सुबह 5.15 बजे रवाना होकर रतनगढ़, डीडवाना, मेड़ता रोड होते हुए जोधपुर शाम 4.50 बजे 11 घंटे 35 मिनट में 473 किमी का सफ र तय करती है। इसमें 49 स्टेशनों के यात्री यात्रा करते है। जोधपुर पहुंचने के बाद यही रैक ट्रेन संख्या 74837 जोधपुर से शाम 5.55 बजे रवाना होकर 39 स्टेशनों से गुजरते हुए 349 किमी का सफ र तय करते हुए रात 3.50 बजे पालनपुर पहुंचती है। इस प्रकार 822 किमी का सफ र यह डेमू 23 घंटे में तय करती है। इस डेमू में मात्र आठ कोच है। जिसमें छह कोच में यात्री सफ र कर सकते है। दो पावर कार है। इन कोचों में ना तो आरामदायक सीटें है और न आरक्षित कोच।

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इन रूट पर चलती है डेमू

जोधपुर से बाड़मेर, जोधपुर से भीलड़ी-पालनपुर, जोधपुर से हिसार जोधपुर से मेड़ता व रतनगढ़ से मेड़ता रूट पर डेमू ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। इन मार्गो पर आए दिन डेमू अटक कर रूक जाती है और जल्दी मंजिल तक पहुंचने के दावे के साथ यात्रा करने वाले यात्री अपने को ठगा सा महसूस करते है। यात्रियों का कहना है कि डेमू ट्रेन में सीटें छोटी होने से बीमार व्यक्ति लंबी दूरी पर सीट पर सही बैठ भी नहीं पाते। डेमू की खिड़कियों के पास जाली लगी होने से यात्री खिड़की से चाय, पानी व नाशता भी नहीं ले पाते।



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