मेडिकोज की ' MeToo डोज ' बोले- अच्छा सोशल प्लेटफार्म, लेकिन कानून का सहारा लेना जरूरी

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जोधपुर.

सोशल मीडिया पर चलाए जा रहे #MeToo कैम्पेन महिलाओं की आवाज उठाने के लिए अच्छा कैम्पेन है, लेकिन किसी पर दोष सिद्ध होने से पहले सोशल मीडिया पर किसी की छवि खराब करना उचित नहीं। महिलाओं पर अत्याचार रोकने के लिए देश में कई कानून है। पहले कानून का ही सहारा लेना चाहिए। मी टू कैम्पेन पर इस तरह की बहस मंगलवार को जोधपुर के एसएन मेडिकल कॉलेज में हुई।

'हैशटेग मी टू अभियान महिला शोषण रोकने का एक न्यायोचित कदम है' विषय पर आयोजित इंटर कॉलेज वादविवाद प्रतियोगिता में जोधपुर के विभिन्न कॉलेज समेत प्रदेश के कुल 10 कॉलेजों की 12 टीमों के 24 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। जिसमें एसएन मेडिकल कॉलेज, लाचू कॉलेज, एम्स मेडिकल कॉलेज, मेडिकल कॉलेज कोटा, मेडिकल कॉलेज झालावाड़, आरएनटी मेडिकल कॉलेज उदयपुर, एमबीएम कॉलेज जोधपुर, व्यास डेंटल कॉलेज जोधपुर, आयुर्वेद विश्वविद्यालय जोधपुर, एसपीएमसी बीकानेर की टीमों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में 7 टीमें पक्ष और 5 टीमों ने विपक्ष में विचार रखे।

प्रतियोगिता में विपक्ष की टीमों के विचारों पर सभागार तालियों से गूंजता रहा। कई छात्रा प्रतिभागियों ने भी मीटू कैम्पेन के विपक्ष में बोलते हुए इस पर सवालिया निशान लगाया। बोले कि सोशल मीडिया के मी टू कैम्पेन से सही मामलों के साथ झूठे मामले भी आ रहे हैं। अभियान का दुरुपयोग कर किसी की जिन्दगी भर की छवि को एक ट्वीट से बर्बाद करना किसी भी तरह से न्यायोचित नहीं है। तो कुछ प्रतिभागियों ने यह कहा कि अत्याचार झेल चुकी महिलाओं को कानून के जरिए न्याय की उम्मीद नहीं रही, तब जाकर मीटू जैसे कैम्पेन का जन्म हुआ।

मेडिकल कॉलेज सभागार में हुए कार्यक्रम की शुरूआत में कॉलेज प्राचार्य डॉ. एस.एस. राठौड़ सहित अतिथियों ने दीप प्रज्वलन किया। इसके बाद डॉ. राठौड़ ने देश में सबसे चर्चित इश्यू मीटू पर विद्यार्थियों के बीच वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उम्मेद अस्पताल की अधीक्षक डॉ. रंजना देसाई ने कहा कि मी टू कैम्पेन का कानून के दायरे में रहकर ही उपयोग करना चाहिए। उन्होंने कैम्पेन की शुरुआत व वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी दी।

कार्यक्रम में एम्स जोधपुर के निदेशक डॉ. संजीव मिश्रा बतौर मुख्य अतिथि मौजूद रहे। संचालन मेडिकल कॉलेज छात्रा लक्ष्मी शर्मा एवं गर्विता सिंहल ने किया। प्रतिभागियों के विचारों पर निर्णायकगण ने सवाल पूछे और प्रतिभागियों ने उनके जवाब भी दिए। इसके बाद डॉ. अनुरागसिंह के निर्देशन में जस्ट ए मिनट (जेम) प्रतियोगिता हुई।


तपस्या ने जीता बेस्ट डिबेटर का पुरस्कार

मी टू कैम्पेन पर वाद-विवाद प्रतियोगिता में निलेश खण्डेलवाल व नेमसिंह राजपुरोहित विजेता रहे। प्रथम रनर अप व्यास डेंटल कॉलेज की हर्षिता अग्रवाल व मनस्वी जांगिड़, द्वितीय रनर अप एम्स जोधपुर के विद्यार्थी इशांत कुमार साहू व जागृति झा, बेस्ट स्पीकर एसएन मेडिकल कॉलेज की छात्रा तपस्या राजपुरोहित, बेस्ट विपक्ष-वितर्क का पुरस्कार व्यास डेंटल कॉलेज की मनस्वी जांगिड़ ने जीता। जस्ट ए मिनट प्रतियोगिता में मेडिकल कॉलेज जोधपुर के कुशाल बंग विजेता रहे और एम्स की छात्रा उदिता पाटनी रनर अप रही। मुख्य अतिथि एम्स निदेशक डॉ. मिश्रा एवं मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. राठौड़ ने विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए।



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