अमित दवे/जोधपुर. जोधपुर के निर्यातकों को नगर निगम से जारी होने वाली फायर एनओसी के लिए काफ ी मशक्कत करनी पड़ रही है। हैण्डीक्राफ्ट इकाइयों में आगजनी की स्थिति से निपटने व रोकथाम से संबंधित फायर फाइटिंग उपकरण होने की पुष्टि होने पर ही सोशल ऑडिट में इकाइयों को सही माना जाता है। इसके बाद कई नामी विदेशी बाइंग हाउस व बड़े बायर्स यहां के निर्यातकों को ऑर्डर्स देते हैं, अन्यथा बड़े निर्यात ऑर्डर्स कैन्सिल हो जाते हैं। निर्यातकों के अनुसार फायर एनओसी के लिए कई बार निगम में सम्बंधित दस्तावेज एवं फ ीस जमा करवाने के बाद भी समय पर एनओसी जारी नहीं होती है। फायर एनओसी के लिए जटिल मापदण्ड व जटिल प्रक्रिया से निर्यातकों को महिनों चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इसका सीधा प्रभाव इकाइयों में होने वाली सोशल ऑडिट व निर्यात ऑर्डर्स पर पड़ रहा है।
क्या है फायर एनओसी
फायर एनओसी लेने के लिए निर्यातकों की इकाई में फायर से सम्बधित फायर फाइटिंग उपकरण व आग बचने के सुरक्षा उपाय लगाने होते हैं। हैण्डीक्राफ्ट इंडस्ट्री में सुरक्षा खामियों व लापरवाही की वजह से आगजनी की शिकार हो रही है। इन इकाइयों में वुडन मैटेरियल के उपयोग करने, उससे निकलने वाले बुरादे, पॉलिश मैटेरियल, पैकिंग मैटेरियल तथा इकाइयों के कच्चे पक्के शेड्स की वजह से आग तेजी के साथ फैलती है। पिछले 3 वर्षों में औद्योगिक क्षेत्र में हुई आगजनी में से सबसे ज्यादा हैण्डीक्राफ्ट्स इकाइयों में हुई।
वर्ष...... इकाइयों में आगजनी की घटना..... नुकसान
2014-15 .... 16 इकाइयां ..... करीब 24 करोड़
2015-16 .... 10 इकाइयां ..... करीब 16 करोड़
2016-17 .... 09 इकाइयां ..... करीब 12 करोड़
इनका ये है कहना
सोशल ऑडिट में इकाई की पूर्ण जांच के साथ फायर एनओसी की मुख्य भूमिका होती है। फायर एनओसी नहीं होने से काफी दिक्कतें होती हैं और ऑडिट पूरी नहीं होती है। महापौर से इस समस्या के जल्द समाधान की मांग की गई है।
डॉ. भरत दिनेश, अध्यक्ष, जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन
जिन निर्यातकों ने फायर एनओसी से संबंधित आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर आवेदन किया है। उनको फायर एनओसी जारी कर दी जाएगी। जिन्होंने नहीं किया है, उनको भी नियमानुसार आवेदन करने पर जारी कर दी जाएगी।
घनश्याम ओझा, महापौर
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