बिलाडा (जोधपुर). कस्बे के 36 कौम के लोगों ने जिस आशा एवं उम्मीद के साथ लाखों का जन सहयोग एकत्र कर ट्रॉमा सेंटर का निर्माण करवाया वहां चिकित्सकों एवं अन्य महत्वपूर्ण पदों पर सरकार द्वारा नियुक्ति नहीं करने से अब यह भवन मात्र डिस्पेंसरी बनकर रह गया है।
बर से बनाड़ तक के डेढ़ सौ किलोमीटर की दूरी वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं एवं समय रहते उपचार नहीं मिलने पर वर्ष में सौ से अधिक होने वाली मौतों को रोकने के लिए कस्बे के लोगों ने करीब चार करोड़ की राशि खर्च कर आधुनिक सुविधाओं वाला ट्रोमा सेंटर भवन बनवाया। इसमें महानगर जैसे ट्रोमा सेंटर वाले आधुनिक जीवन रक्षक उपकरण भी लगवा दिए। इसके बावजूद विभागीय मंत्री ने वायदे के अनुसार समय रहते चिकित्सकों की नियुक्तियां नहीं की।
हजारों लोगों की मौजूदगी में हुआ था वायदा
ट्रोमा सेंटर भवन बनकर तैयार हो जाने और लोकार्पण समारोह के दौरान लोगों के बीच चिकित्सा मंत्री कालीचरण सर्राफ ने वादा किया कि वह 15 दिनों में ट्रोमा सेंटर के अनुरूप बेहतर चिकित्सकों एवं अन्य स्टाफ की नियुक्ति कर देंगे।
इसके 20 से 25 दिनों बाद निर्वाचन आयोग द्वारा आचार संहिता लगने के बाद ग्रामीणों को अब भरोसा नहीं रहा कि अब भी स्टाफ लगेगा। और वरिष्ठ चिकित्सकों के अभाव में ट्रोमा सेंटर अब मात्र डिस्पेंसरी ही बनकर रह गया है वर्तमान में दो चिकित्सक एवं कुछ नर्सिंग स्टाफ ही लगे हुए हैं।
यह पद है रिक्त
ट्रोमा सेंटर में अभी तीन चिकित्सा अधिकारी, एक निश्चेतक चिकित्सा अधिकारी, चार रेडियोग्राफर, दो ईसीजी टेक्नीशियन, चार फार्मासिस्ट, एक लैब टेक्नीशियन एवं चार सहायक, कार्यालय सहायक एक, कनिष्ठ सहायक दो, सूचना सहायक एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी 8, स्वीपर 4, सुरक्षाकर्मी के पांच पद रिक्त हैं।
इन्होंने कहा
आचार संहिता के रहते राज्य सरकार पदों पर नियुक्ति नहीं कर सकेगी। बावजूद मैं अपने प्रयासों से बिलाड़ा ट्रोमा सेंटर में कुछ डॉक्टर भेजूंगा।
-सुनील बिष्ट, जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जोधपुर।
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