बरसों से भोपालगढ़ पुलिस थाने के मालखाने में कैद है राष्ट्रपिता की प्रतिमा

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भोपालगढ़ (जोधपुर). देश को गुलामी की बेडिय़ों से मुक्त करवाकर आजादी में जीने का सलीखा सिखाने वाले राष्ट्रपति महात्मा गांधी की एक प्रतिमा ऐसी है, जो पिछले कई बरसों से खुद पुलिस थाने के मालखाने में कैद पड़ी है। ऐसे में एक ओर जहां मंगलवार को पूरा देश राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को याद कर रहा होगा। वहीं दूसरी ओर भोपालगढ़ कस्बे के पुलिस थाने के मालखाने में पड़ी गांधीजी की यह प्रतिमा इस बार भी उपेक्षा का शिकार हो जाएगी।

 

असल में करीब 36 वर्ष पहले कस्बे के कुछ समाजसेवियों ने चंदा एकत्रित कर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा लगाने के लिए सब्जी मंडी के पास स्थित जैन रत्न विद्यालय के मुख्य द्वार के ठीक सामने एक स्मारक बनवाया था और इस पर बापू की प्रतिमा भी मंगवा कर स्थापित कर दी थी, लेकिन एन वक्त पर प्रतिमा के अनावरण के लिए बुलाए गए अतिथियों के किसी कारणवश नहीं आ पाने के कारण प्रतिमा अनावरण का कार्यक्रम रद्द करना पड़ा था। जिसके बाद कई दिनों तक प्रतिमा अनावरण का यह कार्यक्रम पुन: नहीं बन पाया और प्रतिमा वही इस स्मारक पर पड़ी रही।


इस दौरान कोई समाजकंटक प्रतिमा के साथ छेड़छाड़ नहीं कर दे, इस लिहाज से जैन विद्यालय के शिक्षकों ने स्मारक पर कपड़े में ढकी बापू की प्रतिमा को विद्यालय के हॉल में रखवा दिया था। इसके बाद करीब 25 साल तक बापू की यह प्रतिमा इसी विद्यालय के हॉल में पड़ी रही।

 

इसके बाद किसी ने इस प्रतिमा को विद्यालय के हॉल से उठाकर कबाड़ में पटक दिया। इसको लेकर जानकारी मिलने पर गांव के लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और बापू की प्रतिमा की ऐसी दुर्दशा देखकर आज से करीब 8-9 साल पहले गांव के लोग एकत्रित हुए और उन्होंने बापू की इस प्रतिमा को स्मारक पर लगाने की मांग करने लगे।


इधर विद्यालय प्रशासन ने प्रतिमा अपनी बताते हुए देने से इनकार कर दिया। इसके चलते मामला उग्र रूप लेने लगा तो मौके पर पुलिस ने पहुंचकर स्थिति को संभाला और कस्बे में शांति व्यवस्था भंग नहीं हो इसके लिए दोनों पक्षों से समझाइस की। लेकिन दोनों पक्ष माने नहीं तो पुलिस ने प्रतिमा को अपने कब्जे में ले लिया और जब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हो तब तक प्रतिमा को स्थानीय पुलिस थाने के मालखाने में रखवा दिया।

 

तब से करीब आठ-नौ वर्षों से यह प्रतिमा पुलिस थाने के मालखाने में ही रखी हुई पड़ी है और इसके बाद न तो किसी कांग्रेसी नेता ने और ना ही ग्राम पंचायत अथवा अधिकारियों ने बापू की इस प्रतिमा को मालखाने से मुक्त करवाने की पहल की। हालांकि ग्राम पंचायत ने एक बार गांधी प्रतिमा के स्मारक को जरुर तैयार करवाया लेकिन स्मारक पर प्रतिमा स्थापित करने के लिए कोई ठोस कदम आज तक नहीं उठाए।



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