शुद्ध खान पान बना पार्वती के शतायु का राज

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बिलाड़ा. अपनी उम्र के सौ वर्ष पार कर चुकी पार्वती देवी बताती है कि शुरू से ही वह कृषि फार्म पर ही रही है। जहां घर के खेत का अनाज, सब्जियां एवं गाय, भैंस का दूध व दही होता रहा है। यही उसका मुख्य आहार रहा है।

उम्र के इस पड़ाव में चार दांतों ने साथ छोड़ दिया है। वैसे पार्वती देवी स्वयं आज भी ब्रह्ममुहूर्त में उठकर धूप, ध्यान एवं माला फेरना, नहाना, स्वयं के कपड़े तक धो लेने का माद्दा रखती है। दिन भर वह पोते -पोतियों के साथ हंसते-खेलते दिन बीता लेती है। बीमारी अभी भी उसके निकट नहीं आ सकी है। इसी खान पान व जीवनशैली की बदौलत उन्होंने रविवार को अपना सौवां जन्मदिन पूरे परिवार के साथ मनाया।

 

नब्बे से अधिक लोगों के परिवार की मुखिया पार्वती देवी की उम्र के सौ वर्ष पूरे होने पर लालावत परिवार की ओर सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में 101 वां जन्मदिवस मनाया। इस मौके आई पंथ के राष्ट्रीय धर्म गुरु दीवान माधव सिंह ने भी शतायु पार्वती देवी के दीर्घायु की कामना की। सीरवी लालावत परिवार के झालरा बेरे की मालकिन एवं दो बेटियों एवं चार बेटों की मां पार्वती देवी की उम्र के सौ वर्ष पूरे होने पर कृषि फार्म को रंगीन रोशनी से सजाया। सभी घरों में फूल पत्तियों की झालर लटकाए तथा सभी रिश्तेदारों एवं लोगों को आमंत्रित कर अपनी मां के हाथों 100 लिखा केक कटवाया।


इस मौके धर्मगुरु दीवान माधव सिंह ने आई माता की महाआरती की और कहा कि, मनुष्य के जीवन में जब सद्गुणों का प्रादुर्भाव होता है, तो दुख कलेश बहुत दूर रहते हैं। इस मौके लालावत परिवार की ओर से मेहमानों का सत्कार किया गया। वहीं शतायु मां को फूल मालाएं पहनाने वालों की लंबी कतार लग गई।



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