आशीष जोशी/जोधपुर। पश्चिमी राजस्थान में सियासी उथलपुथल से नए समीकरण बन रहे हैं। चुनावी तूफान उठने को है। राज्य की राजनीति के दिग्गजों की कर्मस्थली रहे जोधपुर संभाग में बड़ा सवाल है कि क्या भाजपा अपना कब्जा बरकरार रख पाएगी या कांग्रेस पिछले चुनाव की गर्द को झाड़ कर अपने को खड़ा कर सकेगी। वैसे पश्चिमी राजस्थान में नई सियासी क्यारियां भी इस बार गुल खिलाने को तैयार हैं। पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह के पुत्र और शिव विधायक मानवेंद्र सिंह की कांग्रेस के साथ बढ़ती नजदीकियां और जैसलमेर के पूर्व राजपरिवार की रासेश्वरी राजलक्ष्मी के चुनाव लडऩे के ऐलान से चुनाव कुछ अलग समीकरणों की ओर इशारा कर रहे हैं।
आनंदपाल, चतुरसिंह और सामराऊ प्रकरण के कारण सरकार से नाराज चल रहे राजपूतों के वोटों का घु्रवीकरण चुनाव नतीजों में फेरबदल कर सकता है। इस बीच पचपदरा कस्बा पश्चिमी राजस्थान की राजनीति का नया केंद्र बनकर उभरा है।
भाजपा की गौरव, कांग्रेस की संकल्प और मानवेंद्र की स्वाभिमान रैली यहीं पर हुई है। यहां से राजस्व राज्यमंत्री अमराराम चौधरी विधायक है। बाड़मेर-जैसलमेर में सिवाना और जैसलमेर दो सीटें ऐसी हैं, जहां से पिछले दोनों चुनाव भाजपा ने जीते हैं। कांग्रेस के पास केवल एक बाड़मेर सीट ऐसी है, जहां से पिछले दोनों चुनाव में सीट उसके खाते में रही है।
पाली, जालोर और सिरोही में सात सीटें ऐसी हैं, जहां से भाजपा लगातार दो बार जीती है। बाली और पाली से तो लगातार चार बार से भाजपा प्रत्याशी विधानसभा पहुंच रहे हैं। जबकि कांग्रेस के पास ऐसी एक भी सीट नहीं है जहां से उसे लगाातर दो बार भी जीत मिली हो। जोधपुर में 10 में से 9 सीट पर भाजपा है।
2013 के चुनाव में कांग्रेस से केवल सरदारपुरा विस क्षेत्र से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जीते थे। 2008 में गहलोत सरकार बनी थी, लेकिन 6 सीटें भाजपा के खाते में गई थी। भाजपा के पास दो-तीन बार जीतने वाले कई चेहरे हैं।
जिले की लोहावट, शेरगढ़, भोपालगढ़, जोधपुर शहर, सूरसागर और बिलाड़ा कुल छह सीटें ऐसी हैं, जहां से भाजपा पिछले दो चुनाव से जीत रही है। कांग्रेस के पास ऐसी सीट केवल एक सरदारपुरा ही है। कांग्रेस जहां वसुंधरा सरकार में जोधपुर की उपेक्षा की बात कर रही है, वहीं सत्ता विरोधी माहौल भाजपा को और गुटबाजी कांग्रेस को परेशान किए हुए है।
चर्चित सीटें: गहलोत, मानवेन्द्र, गजेन्द्र जैसों का दमखम
सरदारपुरा (जोधपुर)
पिछले पांच चुनाव से कांग्रेस का कब्ज। पूर्व सीए अशोक गहलोत को हराने के लिए भाजपा ने हर बार नया चेहरा मैदान में उतारा, सफल नहीं हो पाई। इस बार गहलोत चुनाव नहीं लड़ते हैं तो कांग्रेस की इस परंपरागत सीट को खतरा हो सकता है। गहलोत के चुनाव नहीं लडऩे की स्थिति में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिवंगत मानसिंह देवड़ा की पुत्री कुंती देवड़ा को मैदान में उतारा जा सकता है।
1998 में गहलोत को मुख्यमंत्री बनाने के लिए मानसिंह ने यह सीट उनके लिए छोड़ी थी। कुंती के अलावा भी एक-दो चेहरे हैं, लेकिन सबसे बड़ा चेहरा तो गहलोत को ही माना जा रहा है।
लोहावट, जैतारण, बाली, सिरोही और जैसलमेर
लोहावट (जोधपुर)से गजेंद्र सिंह खींवसर मंत्री हैं। कांग्रेस यहां मजबूत चेहरे की तलाश में है। जैतारण (पाली) से सरकार में मंत्री सुरेंद्र गोयल विधायक हैं। अंदरखाने उनका विरोध है।यहां कांग्रेस में दावेदारों की संख्या ज्यादा होना गोयल के पक्ष में है।
बाली (पाली) से मंत्री पुष्पेन्द्रसिंह राणावत विधायक हैं।सीट पर सत्ता के विरोध का नुकसान हो सकता है। सिरोही से मंत्री ओटाराम देवासी विधायक हैं। यहां कांग्रेस में धड़ेबाजी है। जैसलमेर से मौजूदा विधायक छोटू सिंह हैं। यहीं पूर्व राजघराने की रासेश्वरी राजलक्ष्मी ने चुनाव लडऩे का ऐलान किया है।
भाजपा-कांग्रेस में गुटबाजी हावी है। कांग्रेस में अभी रूपाराम धनदे और सुनिता भाटी दोनों बड़े दावेदार हैं। सामने मौजूदा विधायक छोटूसिंह और सांगसिंह दावेदार हंै। टिकट मिलने के बाद दोनों ओर भीतरघात और बगावत का खतरा है।
शिव (बाड़मेर)
बाड़मेर जिले की सबसे चर्चित सीट शिव है। यहां से भाजपा के विधायक मानवेंद्रसिंह ने चुनाव से पहले ही पार्टी छोड़ दी है। भाजपा अब यहां से किसको टिकट देगी, यह सबसे बड़ा प्रश्न है। कांग्रेस में कद्दावर नेता अमीनखां है जो एक बार
जीत और एक बार हार का स्वाद चखते रहे हैं।
पचपदरा (बाड़मेर)
भाजपा मौजूदा विधायक अमराराम चौधरी पर ही दावं खेल सकती है, उनके सामने मदन प्रजापत कांग्रेस के सशक्त दावेदार है मानवेंद्र की पत्नी चित्रासिंह को कहीं से मैदान में उतारा जाता है तो शिव के अलावा दूसरा विकल्प पचपदरा भी है।
संभाग के चुनावी मुद्दे
जोधपुर: भाजपा सरकार में जोधपुर की उपेक्षा, फलोदी को जिला बनाना। सामराऊ प्रकरण की छाया भी।
पाली: प्रदूषण और पेयजल संकट।
सिरोही: नर्मदा नहर का पानी जिलेवासियों को उपलब्ध कराने को लेकर पिछले चुनाव में भाजपा ने घोषणा की थी। अब तक पूरी नहीं हुई।
जालोर: रेल सेवा और आरओबी।
बाड़मेर: रिफाइनरी के अलावा विकास का कोई बड़ा मुद्दा नहीं, इसे दोनों दल अपने-अपने तरीके से भुनाने में लगे हैं। मानवेंद्र का स्वाभिमान अभियान भी असर डालेगा।
जैसलमेर: नहरी पानी की कमी और बारानी भूमि का आवंटन बड़ा मुद्दा है।
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