जोधपुर।
राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पर्यावरण स्वीकृति (ईसी) के नाम पर लिया जा रहा शुल्क ईसी की पालना के लिए शून्य साबित हो रहा है। बोर्ड प्रत्येक खनन पट्टाधारक से पर्यावरण स्वीकृति के नाम पर 25 हजार रुपए सरकारी शुल्क के रूप में ले रहा है, जबकि ईसी डिस्ट्रिक्ट एनवायरमेंट इंपेक्ट एसेसमेंट ऑथोरिटी (डिया) कमेटी जारी करती है। इस कमेटी में बोर्ड के अधिकारी सदस्य के रूप में नामित होते है। खनन पट्टाधारक ईसी मे दी जाने वाली शर्तो को पूरी करने के लिए जिम्मेदार होते है। पट्टाधारक ईसी शुल्क बोर्ड में जमा कराते है। ईसी शुल्क पूरे प्रदेश में संचालित हो रहे खनन पट्टाधारकों से लिया जा रहा है। खानधारकों से ईसी के रूप में लिया जाने वाला यह शुल्क पर्यावरण संरक्षण के लिए कहां उपयोग किया जा रहा है, खानधारक अनजान है।
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जोधपुर में करीब 350 खनन पट्टे
जोधपुर में करीब 325-350 खनन पटे है। इनमें से करीब 250 खनन पटे एक्टिव है यानी ईसी शुल्क जमा करवाकर कन्सेंट टू ऑपरेट के लिए आवेदन कर चुके है। इन 250 खनन पट्टों से ईसी शुल्क के नाम पर २५ हजार रुपए लिए गए है, तो यह राशि करीब 62 लाख 50 हजार रुपए है। यह राशि पूरे प्रदेश में संचालित हो रहे खनन पट्टाधारकों से ली जाती है, तो इस लिहाज से राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ईसी शुल्क के नाम पर अरबों रुपए वसूल रहा है।
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खानधारक ईसी की यह शर्ते पूरी करता है
- ईसी की शर्त के अनुसार खनन पट्टे में काम करने वाले मजदूरों को स्वास्थ्य प्रमाण पत्र पेश करना।
- मजदूर का इंश्योरेंस प्रमाण पत्र।
- कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर)के तहत खनन क्षेत्र के आसपास विकास कार्य करना।
- सीएसआर के तहत खनन क्षेत्र में स्कूलों, सामुदायिक भवनों, ग्राम पंचायत क्षेत्र आदि में विकास कार्य करवाना।
- खनन क्षेत्र, राजमार्गो आदि पर पौधरोपण करना, संरक्षण करना, पानी का छिड़काव करना आदि शामिल है।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जगदीशसिंह से सीधी बात
1- क्या ईसी शुल्क लिया जा रहा है ?
- हॉ ईसी शुल्क के रूप में 25 हजार रुपए लिए जा रहे है।
2- इस ईसी शुल्क का क्या उपयोग किया जा रहा है?
- यह शुल्क पर्यावरण विभाग को जाता है। जो मिनरल्स व पर्यावरण रिसर्च व डवलपमेंट संबंधित कार्य करता है। ईसी जारी करने वाली मीटिंग के खर्चे व पत्र व्यवहार आदि खर्चे इसी मद से होते है।
3- जोधपुर में खनन क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण व विकास को लेकर क्या किया जा रहा है?
- यह आप पर्यावरण विभाग को पूछिए।
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