जोधपुर.
बदमाशों पर पुलिस का खौफ खत्म हो चुका है। प्रदेश की राजधानी सहित कई शहरों में हाल के दिनों में हुई अपराध की बड़ी वारदातों से पता चलता है और अब कि जनता का भरोसा भी पुलिस से टूट रहा है।
जोधपुर में आए दिन चोरी, सेंधमारी और दिन दहाड़े महिलाओं की चेन, पर्स और मोबाइल लूट की वारदातें हो रही हैं। ज्यादातर मामलों में आरोपियों का पता लगाने में पुलिस विफल रहती है।
लूृट की शिकार एक महिला ने हिम्मत से काम लेते हुए अपनी भाभी के साथ काफी दूर तक लुटेरों का पीछा कर पुलिस को सौंपा तो उनकी चेन बच गई। हालात इतने खराब हैं कि कई मामलों में तो पीडि़त आरोपियों को पकड़ थाने तक ले आए, पर पुलिस ने उल्टे पीडि़तों को ही धमकाना शुरू कर दिया।
यही वजह है कि कुछ माह पूर्व जारी ‘स्टेटस ऑफ पुलिसिंग इन इंडिया (स्टडी ऑफ परफार्मेंस एंड परसेप्शन) 2018’ की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार देश के 22 राज्यों में राजस्थान सबसे फिसड्डी रहा था। इंसपेक्टर और दरोगा जैसे अधिकारियों से तो जनता परेशान थी ही, वरिष्ठ अधिकारियों के कामकाज से भी संतुष्ट नजर नहीं आई।
भ्रष्टाचार, राजनीतिक दबाव और नफरी की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। भारतीय दण्ड संहिता (आइपीसी) भी सौ साल से ज्यादा पुरानी हो चुकी है। वक्त के साथ इसका नहीं बदलना भी जनता के भरोसे के टूटने का एक बड़ा कारण है।
घटना होने पर देर से पहुंचना, पीडि़त को कानूनी झमेले का डर दिखाना, आरोपित रसूखदार हो तो उसे बचाने के तमाम अनुचित हथकंडे अपनाना, रिश्वत मांगना जैसे मामले रोज अखबारों की सुर्खियां बनते हैं। ऐसी ही घटनाओं का नतीजा है कि आम लोग पुलिस के पास जाने से ही घबराते हैं। इसीलिए किसी पीडि़त की मदद के लिए लोग आगे नहीं आते। उन्हें डर होता है कि पुलिस किसी मामले में फंसा देगी।
आरपीएफ जवानों की सतर्कता से बची महिला की जान
ऐसे दौर में पिछले सप्ताह की दो घटनाओं ने साबित किया कि जरा सी सतर्कता किसी बड़े अपराध को रोक सकती है और किसी की जान भी बचा सकती है। इसके लिए जोधपुर के रेलवे सुरक्षा बल और होमगाड्र्स के जवानों की दिल खोलकर तारीफ की जानी चाहिए। उम्मीद है कि कर्तव्य के प्रति समर्पण की भावना भविष्य में भी बनी रहेगी।
पहली घटना 14 अक्टूबर की है। गृह क्लेश से परेशान एक महिला जान देने के इरादे से घर से निकल रेलवे ट्रैक पर पहुंची और सामने आ रही सवारी गाड़ी की तरफ दौड़ लगाने लगी। महिला की जिंदगी और मौत के बीच फासला लगातार कम हो रहा था, तभी आरपीएफ के जवानों ने दौड़ लगा महिला को पकड़ ट्रैक से हटा लिया।
महिला बेहोश हो गई और उसके मुंह से झाग निकलने लगे। आरपीएफ के जवान उसे रेलवे स्टेशन ले गए और रेलवे अस्पताल की सीनियर मेडिकल ऑफिसर से प्राथमिक उपचार कराने के बाद महिला को महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती कराया।
होम गाड्र्स ने दबोचे शातिर चोर
दूसरी घटना 16 अक्टूबर की है जब शहर की एक कॉलोनी में रात्रि गश्त पर तैनात होमगाड्र्स ने दो चोरों को एक घर में घुसता देख साथी होमगाड्र्स को सूचित कर मौके पर बुलाया, साथ ही घर में सो रहे मकान मालिक को भी मोबाइल के जरिये सतर्क कर दिया।
मकान मालिक ने पड़ौसियों को मोबाइल पर सूचित कर दिया। पड़ौसियों ने होमगाड्र्स के साथ मकान की घेराबंदी कर चोरों को दबोच लिया। ये चोर तीन दिन में करीब दस मकानों में सेंध लगा लाखों के माल पर हाथ साफ कर चुके थे।
पुलिस को इन घटनाओं से सबक लेना चाहिए। वारंटियों को गिरफ्तार करने को उपलब्धि की तरह प्रचारित करने की जगह पुलिस बेड़े में उपलब्ध कर्तव्य परायण और ईमानदार लोगों को तरजीह देनी होगी। तभी शहर में आए दिन हो रही चोरी, सरे आम चेन और मोबाइल लूट की वारदातो पर काबू पाया जा सकेगा। ऐसा होने पर ही पुलिस का इकबाल फिर से बुलंद हो सकेगा।
(yamunashankar.soni@epatrika.com)
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2Ams220
0 comments:
Post a Comment