जोधपुर. चाइना-पाकिस्तान इकॉनामिक कॉरिडोर (सीपीईसी) परियोजना का पाकिस्तान के अवाम पर गहरा असर हुआ है। इस परियोजना के तहत निर्माणधीन गलियारे की वजह से वहां के नागरिकों की जुबां पर दोनों देशों की दोस्ती के तराने छाए हुए हैं। चीन के सहयोग से वहां अर्थव्यवस्था के नए सूर्योदय की बातें हो रही हैं। पाकिस्तान की कल्चर की विशेष पहचान बन चुके आम पाकिस्तानियों के ट्रक भी चीनियों का शुक्रिया अदा करते नजर आ रहे हैं। वहां ट्रकों और सार्वजनिक परिवहन की बसों की सजावट खास तरीके से की जाती है जिसकी दुनिया में पहचान है और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रही है। अब इस सजावट में चीनी प्रभाव परिलक्षित होने लगा है।
हाल ही में पाकिस्तान में तीन सप्ताह की इंटर्नशिप करने वाले पाली के बीटेक छात्र याशवानसिंह कविया ने यह अनुभव ‘पत्रिका’ के साथ शेयर किए। गुजरात के गांधीनगर स्थित पं. दीनदयाल उपाध्याय विवि में अध्ययनरत याशवान के पिता इस्लामाबाद स्थित भारतीय दूतावास में द्वितीय सचिव के पद पर कार्यरत हैं। पाकिस्तान में भारतीय उच्चायुक्त अजय बिसारिया से मंजूरी मिलने के बाद पाकिस्तान गए याशवान ने इंटर्नशिप के दौरान पाकिस्तानी की राजनीति, अर्थव्यवस्था, भूगोल से लेकर वहां की लोक संस्कृति को करीब से देखा।
इस्लामाबाद में रईस अधिक
इंटर्नशिप के दौरान इस्लामाबाद में रहे याशवान के अनुसार वहां होटल, रेस्तरां और मॉल में भारतीयों को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। इस्लामाबाद किसी विकसित देश के शहर जैसा लगता है। वहां रेस्तरां में नॉन वेजिटेरियन डिशेज ज्यादा मिलती हैं। स्थानीय लोगों का रहन-सहन उच्च स्तर का है। उनके पास लग्जरी गाडिय़ां हैं और जीने का अंदाज स्टाइलिश है। लाहौर व करांची जैसे शहर अपेक्षाकृत कम विकसित हैं।
2001 के बाद गरीबी 35 फीसदी घटी
पाकिस्तानी मध्यवर्ग में तेजी से आर्थिक संपन्नता आ रही है। वर्ष 2001 में वहां 64.3 फीसदी गरीबी थी जो अब 29.5 फीसदी से भी कम है। लोगों की औसत आय, उनका रहन-सहन, व्यय क्षमता में इजाफ हुआ है। लेकिन अस्थिर सरकारों और पैचीदा सिविल-मिलिट्री रिलेशनशिप की वजह से आर्थिक अस्थिरता का माहौल कायम रहता है। वहां के नागरिकों को चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे से ऊर्जा क्षेत्र, एफडीआइ, निर्यात सहित कई क्षेत्रों में इजाफा होने की उम्मीद है।
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