फलोदी. मंगोलिया से प्रतिवर्ष शीतकालीन प्रवास पर खीचन आने वाले मेहमान पक्षी कुरजां के खीचन में दस्तक देने के बाद अब पक्षी अपने पड़ाव स्थलों की जांच-पड़ताल में जुट गए हैं और धीरे-धीरे कभी चुग्गाघर, तो कभी तालाब पर जाकर सुरक्षा के लिहाज से पड़ाव स्थलों की पहचान कर हैं।
शीतकालीन प्रवास पर आए कुरजां पक्षी यहां करीब छह माह बाद वापस आए हैं। जिससे खीचन में कुरजां पड़ाव स्थल फिर से आबाद होने लगे है। अब तापमान में गिरावट के साथ ही यहां पक्षियों की संख्या में इजाफा होना शुरू हो जाएगा। खीचन में अब तक करीब 2 सौ पक्षी पंहुच चुके हैं। हालांकि अभी तक पक्षियों की यहां सुचारू दिनचर्या तो शुरू नहीं हुई है, लेकिन पड़ाव स्थलों पर पक्षी अठखेलियां करते देखे जा सकते हैं।
करीब 5500 किमी का सफर तय प्रतिवर्ष खीचन आने वाले कुरजां 24 अगस्त को जोधपुर में देखी गई थी तथा 2 सितम्बर को खीचन आई। खीचन पंहुचने के दौरान पक्षी आकाश में अत्यधिक ऊंचाई पर उड़ते हुए देखे गए। उसके बाद पक्षियों ने अपने पड़ाव स्थलों पर विचरण करना शुरू कर दिया है।
पहले आसमान से किया निरीक्षण
पक्षी प्रेमी सेवाराम माली ने बताया कि कुरजां के पहले जत्थे ने खीचन पंहुचकर लगातार अपने पड़ाव स्थलों का बारीकी से निरीक्षण किया तथा फिर धीरे-धीरे पक्षी कम ऊंचाई पर उड़ते रहे। शनिवार को कुछ पक्षी चुग्गाघर, विजयसागर तालाब, नदी के पास मैदान में विचरण करते दिखे। हालांकि अब तक कुरजां ने नियमित रूप से चुग्गा लेना तो शुरू नहीं किया है, लेकिन अपने पड़ाव स्थलों की पहचान जमीन पर उतरकर कर ली है तथा कभी शाम तो कभी सुबह चुग्गा लेने के लिए पक्षी चुग्गाघर में दिख जाते हैं।
अब सजने लगेगा पक्षियों का संसार
कुरजांनगरी के रूप में विख्यात खीचन गांव में एक साल में 6 माह तक पक्षियों का संसार सजा रहता है और गर्मी की शुरूआत के साथ ही कुरजां की वतन वापसी से गांव सूना हो जाता है। अब तापमान में गिरावट के साथ ही यहां पक्षियों के पंहुचने का सिलसिला शुरू हो जाएगा तथा यहां हजारों की तादाद कुरजां पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र बन जाएगी।
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