महेश कुमार सोनी
फलोदी (जोधपुर). चाहे हादसा हो या कोई बीमारी, जिन्दगी और मौत से जूंझते व्यक्ति को समय पर प्राथमिक उपचार मिल जाए तो उसकी जान बच सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों से प्रतिदिन रैफर होने वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद ही अन्यत्र उच्च चिकित्सा संस्थान में रैफर किया जाता है, लेकिन जहां प्राथमिक उपचार नहीं मिल पाता है, वहां से मरीजों के बड़े अस्पताल तक पंहुचने से पहले ही दम तोडऩे की संभावनाएं ज्यादा होती है।
प्राथमिक उपचार को परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग तीन श्रेणियों में रखा गया है। जिसमें ‘ए’ में एयरवे यानि श्वास नली को साफ करना। ‘बी’ में ब्रीदिंग यानि श्वास लेने में सहायता करने के लिए किसी व्यक्ति द्वारा अपने मुंह से मरीज को ऑक्सीजन देना या ऑक्सीजन सिलैण्डर की मदद से श्वास देना या मरीज के पास एकत्रित भीड़ को दूर कर खुली हवा देना।
‘सी’ में सर्कुलेशन यानि रक्त संचरसण की व्यवस्था को सुचारू करना, जिस में सीपीआर (मरीज को धरातल परपीठ के बल लेटाकर चिकित्साकर्मी मरीज के छाती पर एक के ऊपर एक हाथ रखकर अपने दोनों हाथों को बिना मोड़े तेजी से दबाते है) एक बेहद महत्वपूर्ण प्राथमिक उपचार है। अब इस ए,बी व सी के साथ डी भी जोड़ा गया है। इसमें ‘डी’ डेडली ब्लीडिंग यानि खून के बहाव को रोकना और रुकी हुई हृदय गति को सुचारू करना।
प्राथमिक उपचार में ट्राएज
जब कभी बड़ा हादसा होता है, तो उसमें घायलों की संख्या भी बहुत ज्यादा होती है। एेसे में अलग-अलग प्रकार घायलों को श्रेणीवार करना ही चिकित्सकीय भाषा में ट्राएज कहलाता है, जो फ्रेंच शब्द है तथा जिसका अर्थ है विभेद करना। उसके बाद चिकित्सक व नर्सिंगकर्मी जी-जान से घायलों की जान बचाने में जुट जाते हैं। ट्राएज पद्धति दुर्घटना स्थल या अस्पताल में उपयोग ली जाती है। अगर एम्बूलैंस सभी सुविधाओं से युक्त हो तो ट्राएज में काफी मदद मिल सकती है।
केस-1
गल फांस निकालकर बचाई जान
नाचना में पोस्टिंग के समय दो साल की बच्ची खेलते हुए अचानक बेहोश हो गई थी और श्वास लेने में दिक्कत हो रही थी। जांच के दौरान मुझे अचानक श्वास नली में आवाज सुनाई दी, तो बच्ची को उल्टा लेटाकर उसकी पसलियों में नीचे जोर लगाया तो बच्ची रो पड़ी और मुंह में एक मोटा तिनका आ गया। जो श्वास नली में अटक गया था। वर्तमान में वह बच्ची स्वस्थ है।
डॉ. दिनेश शर्मा, वरिष्ठ चिकित्सक, फलोदी
केस-2
पैर की दोनों फीमर हड्डी का टूटना
राजकीय चिकित्सालय फलोदी के हड्डी रोग विशेषज्ञ ने बताया कि करीब तीन माह पूर्व एक सडक़ हादसे में दो लोगों की फीमर हड्डी में ओपन फेक्चर हो गया था। उसके बाद पैर के अन्दर के हिस्से में लगातार रक्तस्राव हो रहा था। इस दौरान अस्पताल लाते ही उनकी टीम ने घायल को आई फ्ल्यूड आदि लगाकर बचा लिया। वर्तमान में दोनों मरीज स्वस्थ है। अगर फीमर से रक्तस्राव के बाद घायल को रक्त या फ्ल्यूड नहीं लगाया जाए तो अचेत होने के बाद उसकी मौत भी हो सकती है।
डॉ. अभिषेक अग्रवाल, हड्डी रोग विशेषज्ञ, राजकीय चिकित्सालय, फलोदी
केस-3
ईटी ट्यूब लगाकर बचाई जान
हाल ही में बाप से सडक़ पर बस रुकने के बाद उतरे व्यक्ति को पीछे से आए एक वाहन ने टक्कर मार दी थी। जिससे उसके मुंह का भाग (मेण्डीबल) क्षतिग्रस्त हो गया था और मुंह से खून के बहाव के कारण घायल को श्वांस लेने में दिक्कत हो रही थी। जिस पर उनकी टीम ने तत्काल ने ईटी ट्यूब लगाकर घायल को ऑक्सीजन देकर जान बचा ली।
डॉ. रमेश खत्री, निश्चेतना विशेषज्ञ, राजकीय चिकित्सालय, फलोदी
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