जोधपुर। आसाराम मामले में सह अभियुक्त व केन्द्रीय कारागृह में 20 वर्ष की सजा भुगत रही आसाराम की राजदार संचिता उर्फ शिल्पी को अदालत ने जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। शिल्पी पर आसाराम की राजदार और अपराध में सहयोग करने का आरोप है। इस केस में जज ने आसाराम के साथ साथ उसे भी सजा सुनाई थी।
इससे पहले मामले में बहस पूरी होने के बाद बुधवार को अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। पिछली बार सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश बोड़ा व उनके सहयोगी निशांत बोड़ा ने बहस शुरू की थी, जो अधूरी रही थी।
तब उन्होंने शिल्पी के पक्ष में पैरवी करते हुए चालान व सजा के आदेश में अंकित आईपीसी की धाराओं की व्याख्या करते हुए याचिकाकर्ता को दी गई सजा को चुनौती दी थी। वहीं शिल्पी के साथ आसाराम, पीडि़ता व उनके परिजनों के साथ हुए मोबाइल व लैंडलाइन फोन पर बातचीत का टैक्स्ट रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं होने पर भी आपत्ति जताई थी।
मालूम हो कि एससी एसटी कोर्ट के जज मधुसूदन शर्मा ने यौन उत्पीडऩ के मामले में 25 अप्रेल 2018 को शिल्पी व शरद को 20-20 साल की सजा देने के आदेश दिए थे। वहीं आसाराम को आजीवन कारावास की सजा देने के आदेश दिए गए थे।
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