अरविंद सिंह राजपुरोहित/जोधपुर. इसे रीको के अधिकारियों की मिलीभगत कहें या लापरवाही सांगरिया स्थित रीको मिनी ग्रोथ सेंटर में रीको की भूमि पर अतिक्रमियों ने कब्जा करना शुरू कर दिया है। रीको की ओर से मिनी ग्रोथ सेंटर बसाने के समय ओपन लैंड व पार्कों के लिए छोड़ी गई जगहों पर कई औद्योगिक इकाइयों की ओर से औद्योगिक गतिविधियां संचालित हो रही हंै। इन सबके बावजूद रीको अधिकारियों को कोई भनक नहीं है। नतीजन जिन पार्कों में टहलने के लिए भ्रमण पथ होना चाहिए था। सुहाने वातावरण के लिए हरा भरा पर्यावरण होना चाहिए था। वहां औद्योगिक कार्य होते नजर आए।
चारदीवारी बनाकर कर ली इतिश्री, ले रहे स्टोरेज के काम
रीको की ओर से मिनी ग्रोथ सेंटर में कुल पांच पार्कों के लिए जगह छोड़ी गई थी। जिनमें से लगभग चार पार्कों में चारदीवारी कर गेट भी लगाए गए हैं, लेकिन पर्याप्त निरीक्षण व कार्रवाई का भय नहीं होने से पार्क बदहाल होने की कगार पर हैं। इन पार्कों के अंदर व बाहर औद्योगिक इकाइयों की ओर से लकड़ी के उत्पाद बनाने का कार्य किया जा रहा है। सुध नहीं लेने से कई पार्कों की चारदीवारी भी क्षतिग्रस्त हो चुकी है।
अधिकारी सब जानते हैं-
पत्रिका टीम जब पार्क न. 4 में पहुंची तो यहां हैंडीक्राफ्ट उत्पाद बनाने में काम आने वाला सामान रखा था। मौके पर दो व्यक्ति कार्य कर रहे थे। टीम ने जब उनसे परिचय पूछा तो एक व्यक्ति ने स्वयं को पार्क के सामने ही स्थित फैक्ट्री का मालिक बताया। पार्क में हो रहे अतिक्रमण के बारे में उसका कहना था कि उसने पार्क को गोद लिया है। इसलिए उसे पार्क में सामान रखने का अधिकार है। पार्क में सामान रखने के सवाल पर वो रीको के अधिकारियों के साथ अपनी जान-पहचान होने का हवाला देने लगा। उसका कहना था कि रीको के अधिकारियों को इसके बारे में जानकारी है। इतना कहकर अतिक्रमी फिर से अपने कार्य में जुट गया।
नहीं होता व्यावसायिक कार्य
सांगरिया मिनी ग्रोथ सेंटर में बने ओपन लैंड व पार्कों में किसी भी तरह का व्यावसायिक कार्य नहीं किया जा सकता है। कहीं औद्योगिक इकाईयों की ओर से कब्जा कर सामान रखा जा रहा है। तो उन पर जल्द कार्रवाई कर सामान हटवाया जाएगा। साथ ही रीको की ओर से समय-समय पर पार्कों का रख-रखाव भी किया जाता है।
-डीके झा, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक रीको
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