पत्नी के मोबाइल में मृतक से बात करने की कॉल देखकर कर दी युवक की हत्या

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बाप.
देदासरी निवासी शाबीर खान की हत्या के मामले में कार्रवाई करते हुए बाप पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है। प्रारंभिक पड़ताल में मुख्य आरोपी शौकत खान की पत्नी के मोबाइल में मृतक से बात करने की कॉल देखना हत्या का मुख्य कारण बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार एएसपी फलोदी जस्साराम बोस, डीवाईएसपी हरफूलसिंह व बाप सीआई कैलाशदान चारण के नेतृत्व में अलग-अलग टीमों का गठन किया गया। जगह-जगह दबिश देने के बाद बाप सीआई चारण, मुख्य आरक्षी धर्मेन्द्रसिंह चौधरी व कांस्टेबल रमेश विश्नोई की टीम ने मुख्य आरोपी शौकत अली (३२) पुत्र नूरदीन निवासी देदासरी को नहरी क्षेत्र बज्जु (बीकानेर) से दस्तयाब किया। इसी प्रकार सह आरोपी किशनसिंह पुत्र कुम्पसिंह राजपूत निवासी सत्याया को नाचना (जैसलमेर) से दस्तयाब किया। कार्रवाई में मुख्य आरक्षी नरेन्द्रसिंह, एसआई अभयसिंह, इमरान खान, रूघाराम, ओपाराम, सुनिल कुमार, रमेश कुमार टीम में शामिल थे।

यह तथ्य आए सामने : पुलिस ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आए कि मुख्य आरोपी शौकत अली व मृतक शाबीर खान दोनों निवासी देदासरी पिछले दो वर्ष से साथ व्यापार कर रहे थे। वारदात से करीब एक माह पूर्व शौकत अली ने अपनी पत्नी में मोबाइल में मृतक शाबिर खान से बात करने की कॉल देखी। इसके बाद से शौकत के मन में शाबिर को लेकर गुस्सा पनपा। इसके बाद शौकत ने शाबिर के साथ अपने व्यापार से संबंधित लेन-देन कर उसको अलग करने के बारे में सोचा। १८ सितंबर को शौकत ने फोन कर शाबिर को बकाया लेन-देन के लिए अपने घर बुलाया। घर पर शौकत व शाबीर के बीच पत्नी से मोबाइल पर बात करने को लेकर विवाद हुआ। विवाद बढऩे पर शौकत अली ने अपने पास रखी अवैध पिस्तॉल से शाबिर पर फायर किया। सिर में गोली लगने से शाबिर की मौत हो गई। इसके बाद आरोपी शौकत ने अपने मित्र किशनसिंह को गाड़ी लेकर घर बुलाया तथा शाबिर की लाश कही दूर फेंकने की योजना बनाई। गाड़ी का टायर पंक्चर होने से उनका मंसूबा कामयाब नहीं हुआ। इसके बाद शौकत व किशनसिंह हत्या में प्रयुक्त पिस्तौल के साथ बाइक से फरार हो गए।
यह था मामला

नजीर पुत्र मोइबदीन मूसलमान निवासी देदासरी ने रिपोर्ट दी थी कि 18 सितंबर को दिन में उसके भाई शाबिर के मोबाइल पर शौकत पुत्र नूरदीन निवासी देदासरी का फोन आया तथा पैसो के लेन-देन को लेकर शोकत ने शाबीर को अपने घर बुलाया। उसका भाई शाबिर शौकत से पैसे मांगता था, जिसे लेने वह उसके घर गया। शाम तक वापस घर नहीं लौटने तथा मोबाइल बंद आने पर उसने रात्रि करीब १० बजकर १० मिनट तक शौकत से मोबाइल पर बात की तो उसने बताया कि उसका भाई पैसों का हिसाब कर शाम चार बजे ही चला गया था। १९ सितंबर सुबह अब्दुल पुत्र अल्लादीन, सदीक पुत्र गफूर खान व प्रार्थी शौकत के घर पहुंचे तो पूरा घर बंद था तथा केवल एक खिड़की खुली थी। घर के आगे काली बोलेरो गाड़ी थी। ये लोग खिड़़की से घर में घुसे तो देखा कि स्टोर कक्ष में खून से लथपथ शाबिर का शव पड़ा था। उसने बताया कि उसके भाई शाबिर की शौकत पुत्र नूरदीन, गाजी खा पुत्र इशाक खा, सत्तार खा पुत्र महेन्द्र खा, अनीस पुत्र सत्तार खां, इशाक पुत्र सरादीन, शकूर पुत्र महेन्द्र खा, मुमताज पुत्र इशाक खा, सदीक पुत्र महेन्द्र खा, मोहम्मद पुत्र महेन्द्र खां, मनसूद पुत्र महेन्द्र खां, इशे खां पुत्र सरादीन खां, रईस पुत्र इसे खां मुस्लमान निवासी देदासरी व पांच-सात अन्य ने मिलकर षडय़ंत्र पूर्वक हत्या कर दी।

 



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