जोधपुर के इस अस्पताल में महिला नर्सिंगकर्मी के साथ हुई ये हरकत, इन घटनाओं ने भी सहमाया

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जोधपुर. मंडोर सेटेलाइट अस्पताल में शुक्रवार रात एक युवक ने महिला नर्सिंगकर्मी के साथ बदसलूकी की। युवक के हरकत से परेशान नर्सिंगकर्मी ने अस्पताल प्रशासन सहित पुलिस को शिकायत की है। आरोप है कि एक युवक अपनी मां को इंजेक्शन लगवाने के लिए चार दिन से अस्पताल आ रहा है। शुक्रवार रात पौने एक बजे करीब वह युवक अस्पताल आया और चिकित्सक की कुर्सी पर बैठ बदसलूकी करने लगा और लात मारकर दरवाजा तोडऩे की कोशिश की। नर्सिंगकर्मी मधु शर्मा ने एतराज किया तो युवक उससे भी उलझ पड़ा। अन्य नर्सिंगकर्मियों ने उत्तेजित युवक को अस्पताल से बाहर निकाला। घटना को लेकर नर्सिंगकर्मियों ने शनिवार सुबह एक घंटे तक कार्य का बहिष्कार किया। नर्सिंगकर्मियों का कहना रहा कि सेटेलाइट अस्पताल में आए दिन ऐसी घटनाएं हो रही है और महिला स्टाफ का नौकरी करना मुश्किल हो गया है। पुलिस को सूचना देते हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मणसिंह सोलंकी का कहना है कि अस्पताल में पहले भी कई घटनाएं हो चुकी हैं। यहां पुलिस जवान या होमगार्ड तैनात होने चाहिए।

अधिवक्ताा के खिलाफ लज्जा भंग के मामले में अंतिम रिपोर्ट पेश


एक महिला की ओर से उच्च न्यायालय परिसर में गत नौ जुलाई को तीन अधिवक्ताओं के विरुद्ध लगाए गए लज्जाभंग और मानहानि के आरोपों को उदयमंदिर थाना पुलिस ने संदिग्ध माना है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (संख्या दो) की अदालत में पेश अंतिम रिपोर्ट में अनुसंधान अधिकारी अशोक आंजणा ने लिखा कि भीड़भाड़ भरे उच्च न्यायालय परिसर में अधिवक्ता द्वारा किसी महिला के साथ बद्तमीजी करने के आरोप निराधार हैं। परिवादिया लक्ष्मी चौधरी के सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दिए बयान और परिस्थितिजन्य साक्ष्य के आधार पर मामला सही नहीं था। उल्लेखनीय है कि राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स ऐसोशिएसन ने भी मामले के खिलाफ पुलिस कमिश्नर को शिकायत दी थी।

नाबालिग लडक़ी भगाने के आरोपी को दस साल कैद की सजा

अपर जिला और सत्र न्यायाधीश (महिला उत्पीडऩ) की पीठासीन अधिकारी मनीषा चौधरी ने नाबालिग लडक़ी फुसलाकर को भगाने के मामले में राजा परचानी को दोषी मानते हुए दस साल की सजा व दस हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। लडक़ी की मां ने 17 जून 2014 को शास्त्रीनगर थाने में लिखित रिपोर्ट पेश की थी। एडीजे कोर्ट में सरकार की ओर से अपर लोक अभियोजक श्रवणसिंह राजपुरोहित ने नाबालिग के अपहरण को गंभीर प्रकृति का अपराध बताते हुए सख्त से सख्त सजा देने का आग्रह किया था। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आरोपी को दोषी मानते हुए सजा के आदेश दिए।



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