व्यापारियों के मध्यस्थों ने किसानों से गिरदावरी लेकर पेश कर लिए थे टोकन

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जोधपुर.

किसानों से समर्थन मूल्य पर लहसुन खरीद के लिए खोले खरीद केन्द्रों पर करोड़ों रुपए के घोटाले की जांच में एसीबी के समक्ष चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अब तक की जांच के बाद ब्यूरो का दावा है कि खरीद केन्द्रों पर लहसुन की उपज पहुंची ही नहीं थी। मात्र कागजों में ही लहसुन की खरीद हुई थी। इस संबंध में साक्ष्य एकत्रित करने के लिए कागजों में लिखे ट्रक चालकों के मोबाइल नम्बर की लोकेशन पता करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उधर, मोटे मुनाफे के लालच में व्यापारियों ने अपने मध्यस्थों के मार्फत किसानों से पांच-पांच हजार रुपए में गिरदावरियां लेकर ई-मित्र से लहसुन खरीद के टोकन प्राप्त किए गए थे।
ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गोपाल सिंह भाटी ने बताया कि घोटाले में किसानों के नाम पर व्यापारियों की भूमिका सामने आ रही है। उन्होंने अपने मध्यस्थों के माध्यम से किसानों से गिरदावरियां ले ली थी। बदले में उन्हें मात्र पांच-पांच हजार रुपए ही दिए गए थे। जबकि प्रति बीघा नौ क्विंटल लहसुन की उपज मानकर पांच-पांच बीघा जमीन की गिरदावरियां ली गई थी। जिन्हें ई-मित्र में प्रस्तुत करके लहसुन खरीद के टोकन प्राप्त किए गए थे। इन गिरदावरियों को राजफैड भेजकर खरीद की अग्रिम कार्रवाई की गई थी।

ट्रक व चालकों की लोकेशन से खुलेगी परतें
अब तक जांच में सामने आया है कि खरीद केन्द्रों पर लहसुन पहुंचा ही नहीं। सिर्फ कागजों में ही २६ करोड़ से अधिक रुपए की खरीद हुई थी। इसकी तह तक जाने के लिए एसीबी अब खरीद दस्तावेजों में उल्लेखित ट्रकों के नम्बर व इनके चालकों के मोबाइल नम्बर की लोकेशन खंगाली जाएगी। ताकि यह स्पष्ट हो सके कि खरीद के दौरान वो कहां मौजूद थे? इसकी तह तक जाने के लिए एसीबी अब खरीद दस्तावेजों में उल्लेखित ट्रकों के नम्बर व इनके चालकों के मोबाइल नम्बर की लोकेशन खंगाली जाएगी। ताकि यह स्पष्ट हो सके कि खरीद के दौरान वो कहां मौजूद थे?



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