पारा उतरने के साथ बढ़ेगी कुरजां की तादाद

पोस्ट पसंद आये तो लाइक जरुर करे ?

फलोदी. मंगोलिया, चीन, कजाकिस्तान से प्रतिवर्ष शीतकालीन प्रवास पर आने वाले मेहमान पक्षी डेमोसाइल क्रैन (कुरजां) को अब तक खीचन में अनुकूल वातावरण नहीं मिल पाया है। कारण है कि अब तक क्षेत्र का दिन का तापमान 37 डिग्री के आस-पास चल रहा है तथा दिन में तेज धूप के कारण पक्षी यहां अनूुकूलन स्थापित नहीं कर पा रहे हैं। जिससे खीचन में सितम्बर माह के2 0 दिन बीत जाने के बाद भी कुरजां की संख्या में कोई खास इजाफा नहीं हुआ है। क्षेत्र में दिन का तापमान है 37 डिग्री सेल्सियस है और करीब सौ पक्षी ही खींचन में इन दिनों विचरण कर रहे हैं।
पक्षी प्रेमी सेवाराम माली ने बताया कि खीचन पंहुचे पक्षियों ने अब यहां अपनी दिनचर्या शुरू कर दी है तथा सुबह करीब ७ बजे पक्षी चुग्गाघर पंहुचकर चुग्गा ले रहे हैं। फिर गांव के विजयसागर व रातड़ीनाडी तालाबों पर अठखेलियां करते हैं। शाम को पक्षी नमक उत्पादन क्षेत्र में जाकर रात्रि विश्राम करके सुबह फिर से खीचन का रुख कर लेते हैं।

25 30 डिग्री सेल्सियस तापमान है जरूरी-
जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर के प्राणि विज्ञान के सहायक आचार्य डॉ. हेमङ्क्षसह गहलोत का कहना है कि कुरजां पक्षी सामान्यतया 25 30 डिग्री सेल्सियस तापमान में रहने के अनुकूल है तथा इन दिनों क्षेत्र में दिन का तापमान ज्यादा होने के कारण पक्षियों की संख्या में वृद्धि नहीं हो पा रही है। उनका कहना है कि इस क्षेत्र में मानसून की बारिश कम होने के कारण पक्षियों की संख्या प्रभावित हो सकती है। साथ ही कम बारिश वाले क्षेत्रों में भोजन की उपलब्धता भी प्रभावित हुई है। वहीं अब तक कुछ जगहों पर पक्षी पंहुचे है तथा कई जगहों पर पक्षियों का इंतजार है। गुजरात में यहां से ज्यादा बारिश के कारण पक्षियों के गुजरात पंहुचने की जानकारियां भी मिल रही है। यहां दिन के तापमान में कमी के साथ ही पक्षियों की संख्या में वृद्धि होने की उम्मीद है।

 



from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2MPrx3t
Share on Google Plus

About Atul

This is a short description in the author block about the author. You edit it by entering text in the "Biographical Info" field in the user admin panel.

0 comments:

Post a Comment