अमित दवे/जोधपुर. इस बार मानसून दगा दे गया। शुरुआती बरसात के बाद किसानों ने उत्साह से बुवाई की, लेकिन जिले में बारिश का आंकड़ा औसत को भी पार नहीं कर पाया और असिंचित क्षेत्र में खरीफ की फसल तबाह हो गई। धरतीपुत्रों को अकाल की आशंका तो जुलाई माह के अंत में ही सताने लगी थी लेकिन सितम्बर माह के अंतिम सप्ताह तक भी सर्वे नहीं होने के कारण अकाल घोषित नहीं हो सका। एक तरफ असिंचित क्षेत्र के किसान अकाल की आहट से भयभीत हैं। दूसरी ओर सिंचित क्षेत्र में खेतों में लहलहा रही फसलें कटने को तैयार हैं। इसकी खरीद के लिए भी सरकार की ओर से अब तक कोई तैयारी नहीं है। अब किसान एक ओर अकाल सर्वे तो दूसरी ओर फसल खरीद के लिए सरकार की ओर टकटकी लगाए देख रहे हैं।
विभागीय स्तर पर करवाए गए सर्वे में कुल क्षेत्रफल में हुई बुवाई के करीब 70 प्रतिशत फसल खराबे का अनुमान है। खरीफ सीजन में जिले में कुल 4.50 लाख हैक्टेयर क्षेत्र सिंचित व 9 लाख के करीब असिंचित क्षेत्र में बाजरा, मूंगफ ली, कपास, मूंग, मोठ, अरण्डी, ग्वार, तिल, ज्वार की बुवाई हुई। असिंचित क्षेत्र में बरसात के अभाव में फ सलें जलने के कगार पर हैं। पशुओं के चारे-पानी की व्यवस्था किसानों को भारी पड़ रही है। किसानों के अनुसार असिंचित क्षेत्र में 50 से 100 प्रतिशत तक फ सल खराब हो चुकी है और वे आपदा के तहत मुआवजा और पशुओं के लिए चारे-पानी की व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
केन्द्र की व्यवस्था को ठेंगा दिखाती राज्य सरकार
किसानों की आय दुगुनी करने के लिए केन्द्र सरकार ने पहल करते हुए अधिसूचित फ सलों के समर्थन मूल्य में इस वर्ष बढ़ोतरी की। लेकिन राज्य सरकार की खरीद को लेकर सुस्ती किसानों पर भारी पड़ रही है। मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों में खरीफ सीजन की समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए पंजीयन प्रक्रिया एक माह पहले ही शुरू हो गई। इससे प्रशासन को व्यवस्थित खरीद के लिए व्यवस्थाओं को पुख्ता करने का पर्याप्त समय मिल गया। लेकिन राजस्थान में अभी तक इस सम्बंध में कोई कार्यक्रम तय नहीं हुआ है।
समय पर निर्णय करे सरकार
अकाल से फ सलों का उत्पादन प्रभावित होने से किसान पहले से ही नुकसान में हैं। समय पर खरीद कार्यक्रम घोषित नहीं होने से किसान फ सलों को समर्थन मूल्य से नीचे भाव पर बेचने को मजबूर होंगे। सरकार समय रहते उचित निर्णय ले अन्यथा किसानों को नुकसान से बचाना मुश्किल होगा।
तुलछाराम सिंवर, आंदोलन संयोजक, भारतीय किसान संघ
उत्पादन होगा प्रभावित
विभागीय स्तर पर करवाए गए सर्वे में कुल क्षेत्रफल में हुई बुवाई के करीब 70 प्रतिशत फसल खराबे का अनुमान है। इससे उत्पादन भी प्रभावित होगा। वास्तविक रिपोर्ट राजस्व विभाग की गिरदावरी रिपोर्ट में ही आएगी।
बीके द्विवेदी, उप निदेशक, कृषि विस्तार जोधपुर
बुवाई लक्ष्य लाख हैक्टेयर में
फ सल ---- रकबा
बाजरा 4.80
मूंग 1.85
मोठ 1.25
मूंगफली 1.00
कपास 0.38
तिल 0.35
अरंडी 0.35
ज्वार 0.48
ग्वार 1.00
अन्य 2.00
कुल 13.46 लाख
बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता
ओडिशा के मलकानगिरी के बाद चक्रवाती डे तूफान का असर रविवार को पाली जिले के निमाज क्षेत्र में भी देखने को मिला। लम्बे समय की खामोशी के बाद रविवार को शुरू हुई रिमझिम बारिश ने जहाँ गर्मी व उमस से राहत दिलाई। वही खेतो में पक कर तैयार व कटी फसलो के लिए रिमझिम बारिश ने किसानो के चेहरों पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। रविवार सुबह बारिश का दौर शुरू हुआ, जो दोपहर तक जारी हैं। तेज बारिश से सडक़ों पर तेज वेग से पानी बहने लगा। यहां 15-20 मिनट तक हुई तेज बारिश से खेतों में फसल काट रहे किसान परेशान हो गए। उनहें खेतो में कटी पड़ी फसलें भीगने से महीनों की मेहनत पर पानी फिर जाने का डर सता रहा है। बारिश के कारण कई जगह पानी भर जाने के कारण विद्यार्थियों, राहगीरों व वाहन चालको को परेशान होना पड़ा ।
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