फलोदी के भड़ला गांव में करीब ५ वर्ष पूर्व अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में सूरज की तपिश से देश को बिजली से रोशन करने का सपना देखा गया था। उस वक्त किसी ने भी सोचा तक न था कि सौर ऊर्जा से इस क्षेत्र की इस कदर तस्वीर बदल जाएगी और यहां से प्रतिदिन लाखों यूनिट बिजली का उत्पादन होने से क्षेत्र का नाम दुनिया में रोशन हो जाएगा। अब यहां हालातों ने करवट ली तो यहां देशी कंपनियों के साथ विश्व की गई जानी-मानी कंपनियां भी सौर ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश करने लगी है। जिससे यहां अक्षय ऊर्जा से सस्ती, टिकाऊ व प्रदूषण रहित बिजली उत्पादन के लक्ष्य की तरफ तेजी से कदम बढ़ रहे हैं। साथ ही क्षेत्र में रोजगार के नए अवसरों के रास्ते भी खुल गए हैं।
भड़ला में 2255 मेगावाट का है लक्ष्य-
भड़ला सोलर पार्क का पूरा क्षेत्रफल करीब 10 हजार एकड़ में प्रस्तावित है, जो 40 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र है। जहां सरकरी व निजी कंपनियों द्वारा अलग-अलग चार चरणों में सोलर पार्क विकसित होना है तथा यहां पर कुल 2255 मेगावाट के सौर ऊर्जा संयत्र स्थापित करने का लक्ष्य है। यहां अब तक पहले व दूसरे चरण में कुल 745 मेगावॉट क्षमता के सौर ऊर्जा संयत्र स्थापित हो चुके हैं तथा तीसरे व चौथे चरण में 1500 मेगावॉट के संयत्र निर्माणाधीन है।
पोकरण-फलोदी की सरहद पर भी बनेगा सोलर पार्क-
भड़ला सोलर पार्क द्वारा सफलता का अध्याय लिखना शुरू करने के बाद अब फलोदी-पोकरण की सरदह पर स्थित ढढू, उग्रास, नागणेची नगर, लवां, पुरोहितसर में सोलर पार्क बनाने की कवायद शुरू हो गई है। यहां करीब 10 हजार बीघा जमीन पर 770 मेगावॉट क्षमता के सौर ऊर्जा संयत्र स्थापित किए जाने प्रस्तावित है। यहां कंपनी को फलोदी व पोकरण क्षेत्र से करीब 10 हजार बीघा भूमि आवंटित की जा चुकी है।
खास हैं यहां का रेडिएशन-
पश्चिमी राजस्थान में गर्मी तो इस कदर अपना कहर बरपाती है कि इंसान झुलसने जैसा महसूस करता है। अगर फलोदी क्षेत्र की बात करें तो 2016 की गर्मी ने फलोदी को पूरे विश्व में अधिकतम तापमान को लेकर सुर्खियों में ला दिया था। उस समय यहां का अधिकतम तापमान 51 डिग्री सेल्सियस पर पंहुच गया था। यहां सोलर हब विकसित होने का मुख्य कारण यह है कि यहां सूर्य किरणों का रेडिएशन बहुत ज्यादा है। जिससे ये क्षेत्र विद्युत उत्पादन के लिए उपयुक्त नजर आया है। प्रकृति का वरदान है कि क्षेत्र के बाप, भड़ला व नाचना में रेडिएशन 5.81 किलोवॉट/मी२/दिन है, जो देश में अधिकतम है।
देशी-विदेशी कंपनियां हो रही आकर्षित-
बाप व भड़ला में सौर ऊर्जा उत्पादन के शुरूआत होने के बाद यहां मिले सकारात्मक परिणामों, बेहतर सरकारी संचालन, कनेक्टिविटी, उच्च रेडिएशन व बेहतरीन माहौल से देशी-विदेशी कंपनियों के लिए आकर्षण का केन्द्र बन गया और कुछ ही सालों में यहां कई देशी-विदेशी कंपनियों ने भी बड़े स्तर पर सौर ऊर्जा संयत्र स्थापित कर दिए हैं। यहां वर्तमान में विश्व की जानी मानी कंपनियां जैसे सॉफ्टबैंक, सोलेयर डारेक्ट, फॉरटम कंपनियां विद्युत उत्पादन कर रही है। वहीं देश की रिलायंस, टाटा, महिन्द्रा, आदित्य बिड़ला, आईओसीएल, अडानी, पुन्ज लॉयड, विक्रम सोलर जैसी कई बड़ी कंपनियों ने भी यहां अपना प्लांट लगाकर बिजली उत्पादन में रूचि दिखाई है।
सस्ती बिजली का सपना होगा साकार-
गत वर्ष हुई बिडिंग प्रक्रिया में भड़ला सोलर पार्क के लिए प्रति यूनिट बिजली 2.44 रुपए पर पीपीए हुआ था। अगर देश में कोयले से बनने वाली बिजली की कीमतों से तुलना करें तो इस बिजली की औसतन दर करीब 3.20 रुपए प्रति यूनिट रहती है। एैसे में अब तक की सबसे कम टैरिफ रेट पर भड़ला सोलर पार्क के लिए बिड हुई है। एैसे में भड़ला सोलर पार्क कोयले से भी सस्ती बिजली मिलने की उम्मीदें भी पूरी होगी।
बेहतरीन ग्रिड कनेक्टिविटी-
132 केवी जीएसएस - 10
220 केवी जीएसएस - 7
400 केवी जीएसएस - 1
765 केवी जीएसएस - 1 (निर्माणाधीन)
प्रदूषण मुक्त है अक्षय ऊर्जा-
वैसे तो देश में कई अलग-अलग विधियों से विद्युत उत्पादन हो रहा है, जिसमें अनवीकरणीय स्रोतों का उपयोग किया जा रहा है। इन स्रोतों की उपलब्धता भी सीमित है तथा इन विधियों से विद्युत उत्पादन में प्रदूषण भी होता है, लेकिन सौर ऊर्जा व पवन ऊर्जा से विद्युत उत्पादन की ऐसी विधि है, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत जैसे सूरज की किरणें व हवाओं से विद्युत उत्पादन होता है। जो इस धरती पर कभी खत्म नहीं होगी। साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत से विद्युत उत्पादन प्रदूषण मुक्त होने के कारण केन्द्र व राज्य सरकार के साथ पूरे विश्व की नजरें जमी है। साथ ही सौर ऊर्जा से वायु में कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन भी नहीं होता है और लाखों घरों को बिजली उपलब्ध हो रही है।
बन रहा ग्रीन कोरिडोर-
क्षेत्र में अक्षय ऊर्जा से विद्युत उत्पादन में लगातार हो रहे इजाफे के चलते केन्द्र सरकार अब यहां विद्युत लाइनों में बिजली के प्रसारण के लिए अलग से ग्रीन कोरिडोर बनाने जा रही है। ग्रीन कोरिडोर में सिर्फ अक्षय ऊर्जा से उत्पादित बिजली का ही प्रसारण होगा। इसके लिए भड़ला में 765 केवी का ग्रिड सब स्टेशन निर्माणाधीन है। जिसमें सौर व पवन ऊर्जा संयत्रों से बनने वाली बिजली का प्रवाह होगा तथा यह बिजली सीधे सैन्ट्रल ग्रिड में जाकर पूरे देश में आपूर्ति होगी।
इनका कहना है-
क भड़ला सोलर पार्क में अलग-अलग चार चरणों में सौर ऊर्जा संयत्र लगेंगे। जिसमें अब तक पहले व दूसरे चरण कुल 745 मेगावॉट के संयत्र शुरू हो गए हैं तथा 1500 मेगावॉट का कार्य जारी है।
दिनेश छंगाणी, प्रोजेक्ट मैनेजर, आरआरईसीएल, जोधपुर
क भड़ला सोलर पार्क व आस-पास सौर ऊर्जा उत्पादन संयत्र स्थापित करने में यहां रूचि बढऩे का मुख्य कारण है कि यहां बेहतरीन ग्रिड नेटवर्क स्थापित किया गया है। जिससे यह क्षेत्र सौर ऊर्जा में उभरकर सामने आया है।
जितेन्द्र सोनी, सौर ऊर्जा विशेषज्ञ
---------------------
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2BruJSv
0 comments:
Post a Comment