जोधपुर. उसकी सांसें थम चुकी थी, लेकिन अस्पताल लेकर गए तो जी उठी। उसकी सांसें लौटने में सीपीआर तकनीक कारगर साबित हुई। जिस चिकित्सक ने सीपीआर दी, वह भी हैरत में है कि आंधे घंटे तक पानी में डूबी रहने और सांसें थम चुकी युवती के शरीर में सांसें लौट आई। मामला चार दिन पहले तिंवरी गांव का है। जानकारी के अनुसार 9 अगस्त की शाम तिंवरी निवासी भीखाराम चौधरी की 18 वर्षीय पुत्री इन्द्रा अज्ञात कारण से टांके में गिर गई। उसकी मां व भाई ने देखा तो उसका मुंह पानी में डूबा था, बाल बाहर दिख रहे थे। पूरा शरीर पानी पर तैर रहा था। परिजन उसे तिंवरी के एक हॉस्पिटल लेकर गए। चिकित्सक डॉ. राधेश्याम चतुर्वेदी ने जांच की तो युवती की पल्स थमी पाई गई। परिजन ने चिकित्सक को बताया कि वह करीब आधे घंटे तक पानी में डूबी रह गई।
इस बीच चतुर्वेदी को डॉ. राजेन्द्र तातेड़ की ओर से सिखाई गई सीपीआर थैरेपी याद आई और युवती को सीपीआर देना शुरू कर दिया। युवती के पेट में पानी भरा था, उसे बाहर निकाला। चिकित्सक चतुर्वेदी के अनुसार युवती के पेट का पानी बाहर निकालने के बाद जैसे ही डॉयफ्रॉम पेशी लूज हुई और ऑक्सीजन मिली, तो करीब 40 मिनट बाद हार्ट बीट आने लगी। इस पर एमरजेंसी ड्रेग इस्तेमाल किया तो प्लस व ब्लड प्रेशर रिकवर हो गया और युवती बच गई। चिकित्सक चतुर्वेदी के अनुसार उनके प्रेक्टिस के 23 साल के करियर में यह पहला केस था कि उन्होंने मृत शरीर को सीपीआर देकर चिकित्सा की और जीवनदान दिया। यह किसी चमत्कार से कम नहीं रहा। गौरतलब है कि जोधपुर में सीपीआर थैरेपी के जरिए कई लोगों की सांसें लौट चुकी हैं।
क्या है सीपीआर
सीपीआर के विशेषज्ञ डॉ. राजेन्द्र तातेड़ के अनुसार हार्ट अटैक या अचानक कार्डियक अरेस्ट से क्लिनिकल डेथ के 10 मिनट के भीतर छाती के बीचों-बीच लगातार असरदार तरीके से 100 बार प्रति मिनट दबाव डाला जाता है, उसे सीपीआर कहा जाता है।
हार्ट अटैक व कार्डियक अरेस्ट में फर्क समझें
साामान्यत: लोग हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट शब्द का इस्तेमाल एक ही रूप में करते हैं, लेकिन दोनों एक नहीं है। हार्ट अटैक तब होता है, जब हार्ट में पहुंचने वाले रक्त प्रवाह में अवरोध होता है। वहीं दूसरी ओर कार्डियक अरेस्ट तब होता है, जब हार्ट विद्युतीय प्रक्रिया में अचानक समस्या आ जाती है। इसमें हार्ट अचानक धड़कना बंद कर देता है।
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