जोधपुर. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन से समूचा देश शोकाकुल है। विदेशों में भी उन्हें श्रद्धांजलि दी जा रही है। मारवाड़ की जनता उनसे आत्मीय लगाव महसूस करती रही है। यहां के जनप्रतिनिधियों सहित लोगों से उनका जुड़ाव अंत तक बना रहा। इस कड़ी में जोधपुर के वयोवृद्ध ब्रह्मदेव बोड़ा ने पूर्व पीएम वाजपेयी से जुड़े अपने संस्मरण याद करते हुए उनके साथ बिताए पल पत्रिका के साथ साझा किए। 42 वर्षों तक आदर्श विद्या मंदिर में शिक्षण कार्य में जुटे रहे बोड़ा ने यादों के समंदर में गोता लगाते हुए बताया कि यह बात जून 1973 की है। उस दौर में वे पांचजन्य साप्ताहिक में उपसंपादक के रूप में कार्यरत थे। संपादक स्व. दिनानाथ मिश्रा ने एक लेख के लिए अटल बिहारी वाजपेयी के निवास स्थान जा कर साक्षात्कार लेने का दायित्व बोड़ा को सौंपा था। उन दिनों वाजपेयी ग्वालियर के सांसद थे। पूर्व पीएम की ओर से उन्हें सुबह 9 बजे मिलने का समय दिया गया था।
पूर्व पीएम वाजपेयी के समय की प्रतिबद्धता के चलते बोड़ा सुबह पौने नौ बजे ही उनके निवास स्थान पर पहुंच गए। लेकिन यहां वाजपेयी के निजी सहायक शिव कुमार पारीक ने उन्हें बाहर ही रोक लिया और यहां-वहां की बातों में उलझा दिया। संघ से जुड़े बोड़ा ने बताया कि शिव कुमार उनके साथ संघ के प्रथम व द्वितीय वर्ष में साथ थे। इसलिए बातों में उन्हें समय का मालूम ही नहीं चला। नए पत्रकार होने के कारण भी उन्हें यह याद नहीं रहा कि कोई उनका इंतजार कर रहा है और वह भी अटल वाजपेयी जैसी शख्सियत।
समय की पाबंदी नहीं होती
इस दौरान पूर्व पीएम ने निजी सहायक को आवाज लगाकर पूछा कि पांचजन्य वाले आए हैं या नहीं? इस पर शिव कुमार ने कहा कि जाओ ताऊ तुम्हें बुला रहे हैं। उनके अंदर जाने पर पूर्व पीएम वाजपेयी ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि राजस्थान वालों को समय का पता ही नहीं लगता है। उन्हें समय की पाबंदी नहीं होती। इस पर सफाई देते हुए बोड़ा ने उन्हें कहा कि वे समय पर ही आ गए थे लेकिन बाहर बिठा दिए गए थे। इसके बाद समय न गंवाते हुए वाजपेयी साक्षात्कार देकर तुरंत संसद के लिए निकल गए।
सिर पर हाथ फेर जताया था स्नेह
बोड़ा ने बताया कि उन दिनों उत्तर प्रदेश में उर्दू भाषा को लेकर उठे विवाद विषय पर साक्षात्कार लेना था। पूर्व पीएम ने करीब 40 मिनट खुलकर विषय पर अपनी बात रखी। साक्षात्कार समाप्त होने पर पूर्व पीएम ने उनके सिर पर स्नेह से हाथ फेरा और कहा कि आइंदा शिव कुमार की बातों में न आएं और समय न गवाएं। उल्लेखनीय है कि 73 वर्षीय ब्रह्मदेव बोड़ा ने 42 साल आदर्श विद्या और आरएसएस को समर्पित किए हैं। आपातकाल के दौरान 20 माह उन्हें जोधपुर कारागृह में भी बिताने पड़े थे। उन्होंने बताया कि अक्टूबर 1973 के बाद पांचजन्य का मुख्यालय लखनऊ शिफ्ट किया गया था। जिसके बाद स्टाफ को अलग-अलग जगह भेजा गया। ब्रह्मदेव बोड़ा को वापस राजस्थान भेज आरएसएस से जुड़े शिक्षण क्षेत्र में भेजा गया था।
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