तो फिर स्वच्छ सर्वेक्षण की रैंकिंग पर खरी कैसे उतरेगी पंचायतें ?

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जोधपुर.
ग्रामीण स्वच्छता मिशन के तहत एक अगस्त से शुरू होने वाले स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण सर्वेक्षण में कई ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण की पोल खुलने वाली है। क्योंकि जिले में कई ग्राम पंचायतों में इस साल जारी प्रशासनिक स्वीकृति में से आधे काम भी पूरे नहीं किए गए हैं। और अधिकतर काम वित्तीय स्वीकृति के कारण भी अटके हुए पड़े हैं। ज्ञात है कि स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण 2018 के तहत 1 से 31 अगस्त 2018 तक स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण सर्वेक्षण की नतीजों की घोषणा मात्रात्मक एंव गुणात्मक स्वच्छता के पैमाने के आधार पर सभी जिलों एवं राज्य की रैंकिंग के रुप में की जाएगी।


जोधपुर जिला परिषद ने सभी पंचायत समितियों को ओडीएफ निर्धारित लक्ष्य की समय सीमा में कर दिया है। लेकिन जिला स्वच्छता मिशन के तहत सार्वजनिक शौचालयों निर्माण में बिल्कुल रुचि नहीं दिखाई। स्थिति यह है कि जिन 256 सार्वजनिक शौचालय कि वित्तीय स्वीकृति जारी की गई है, जिसमें आधे कार्य पूर्ण किए गए, शेष कार्य पिछले दो साल से अटके हैं। पिछले साल के लक्ष्य के मुताबिक 142 कार्यों की प्रशासनिक स्वीकृति निकले हुए 8 माह से अधिक समय हो चुका है, लेकिन एक भी पत्रावली की वितीय स्वीकृति नहीं जारी हुई। पत्रावलियां 5 माह से अधिक समय लम्बित पड़ी है। जिले के कई सरपंच के जिला परिषद चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कोई जवाब देने वाला नहीं है।


क्या है स्वच्छता सर्वेक्षण 2018
दिल्ली में स्वच्छ भारत ग्रामीण 2018 का शुभारंभ किया गया था। देश में बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों व राज्यों को संभवतया 2 अक्टूबर 2018 को अवार्ड प्रदान किया जाएगा। स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण के अंदर जिले के कई गावों को कवर किया जाएगा। सर्वेक्षण के लिए इन गांवों के कई स्कूलों, आंगनवाड़ी केन्द्रों सार्वजनिक स्वास्थ्य केन्द्रों, हाट/ बाजार/ धार्मिक/ स्थानों जैसे सार्वजनिक स्थानों की स्थिति देखी जाएगी। ग्रामीणों से सीधी बातचीत के साथ-साथ ऑनलाइन फीडबैक के जरिए रैकिंग की जाएगी।


स्वच्छ भारत मिशन : एक नजर
अक्टूबर 2014 में स्वच्छ भारत मिशन शुरु किया गया था। उस समय ग्रामीण क्षेत्र में ज्यादातर लोग खुले में शौच के लिए मजबूर थे। उस समय जिले का प्रतिशत करीब 35 था। बेसलाइन सर्वे के अनुसार कुल परिवार 484788 थे। स्वच्छ भारत मिशन के तहत पिछले तीन साल में तेजी आई और आंकड़ा शत प्रतिशत पहुंच गया और जिले की 466 ग्राम पचायतें ओडीएफ हो गई।
इनका कहना है-
स्वच्छ भारत मिशन के तहत सार्वजनिक शौचालय निर्माण के संबंध में एक भी पत्रावली पेडिंग नहीं है। जो भी पत्रावलियां प्राप्त हुई, सभी को वित्तीय स्वीकृति के लिए भेज दिया।
-दलवीरसिंह ढड्ढा, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जोधपुर



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