अमित दवे/जोधपुर। खान एवं भू विज्ञान विभाग में अंधेरगर्दी का आलम यह है कि विभाग के अधिकारियों ने निदेशालय के आदेशों की अनदेखी कर नए खनन पट्टों के आवंटन के लिए गलत प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भेज दिए। बाद में, मामला सामने आने पर निदेशालय को उन पर रोक लगानी पड़ी। ऐसा ही मामला खनिज अभियंता जोधपुर कार्यालय में सामने आया है। बावड़ी तहसील के कास्टी गांव में नई खानों के लिए भूखण्ड आवंटन होने थे। विभाग के अधिकारियों ने आवंटन प्रक्रिया से अस्वीकृत किए जा चुके भूखण्डों को भी शामिल कर ई-नीलामी के लिए विज्ञप्ति जारी कर दी थी। जिनके लिए निदेशालय ने अब रोक लगा दी है।
खान विभाग के उच्चाधिकारियों के निर्देश है कि जिन खनन पट्टों व आवेदनों को 3 अप्रेल 2013 के आदेश से निरस्त किया गया, उन प्लॉटों को आवंटन प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाए। क्योंकि उक्त प्लॉटों का प्रकरण सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। नए खनन पट्टा आवंटन के लिए प्रस्तावित प्लॉट का भौतिक सत्यापन व ड्राफ्ट्समैन द्वारा पूर्ण रूप से पास करने के बाद प्रस्ताव तैयार किए जाते हैं। इसके बावजूद जोधपुर के खनिज अभियंता ने आनन-फानन में तैयार किए प्रस्तावों में अस्वीकृत भूखण्डों को भी शामिल कर लिया। जिसकी जानकारी प्रस्ताव को तैयार करने में लगे अधिकारियों-कर्मचारियों की टीमों में से किसी को नहीं लगी।
30 भूखण्डों पर लगी रोक
कास्टी गांव में सेण्ड स्टोन खनन पट्टे के लिए निर्धारित भूखण्डों में से भूखण्ड संख्या 32, 33 तथा 37 से 64 तक करीब 30 भूखण्डों पर रोक लगाई गई है। आवेदकों ने खान आवंटन की बोली के लिए ई-नीलामी सेवा प्रदाता कंपनी एमएसटीसी लिमिटेड में रजिस्ट्रेशन करवाकर 7500 रुपए शुल्क भी जमा करवा दिए। लेकिन प्रक्रिया रुक जाने से मामला अटक गया।
2013 में किया था निरस्त
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने खान आवंटन प्रक्रिया पर सवाल उठने के बाद 3 अप्रेल 2013 को प्रदेशभर के करीब 54 हजार आवेदित खनन पट्टों को निरस्त कर दिया था। निरस्त किए गए खनन पट्टों में कास्टी गांव के उक्त 30 भूखण्ड भी शामिल थे।
जो भूखण्ड आवंटन प्रक्रिया के लिए अस्वीकृत हैं, निदेशालय ने उन पर रोक लगा दी है। आगामी आदेश तक उक्त भूखण्डों को नीलामी प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाएगा। शेष में आवंटन प्रक्रिया जारी है।
श्रीकृष्ण शर्मा, खनिज अभियंता जोधपुर
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