ठेके पर दी बिजली लाइनें बिन मौसम हो रही धराशायी, प्रसारण निगम झेल रहा करोड़ों का नुकसान

पोस्ट पसंद आये तो लाइक जरुर करे ?

अविनाश केवलिया/जोधपुर. इस बार मारवाड़ में अब तक बारिश की अधिकता नहीं है, लेकिन फिर भी बिजली लाइनें व बड़े बिजली पोल सर्वाधिक धराशायी हुए हैं। एक के बाद संभाग में प्रसारण निगम के सिस्टम के धराशायी होने से एक करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। यह सभी लाइनें और पोल निगम ने ठेके पर खड़े किए थे, जबकि ऐसी पुरानी लाइनें जो खुद निगम कार्मिकों ने खींची थी, वे अब भी सुरक्षित खड़ी है।

 

राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड जो कि विद्युत उत्पादन के बाद से वितरण जीएसएस तक बिजली पहुंचाने का काम करता है, पिछले दो माह में सर्वाधिक नुकसान झेल चुका है। पहले जैसलमेर में 400 केवी और 220 केवी के बिजली पोल व लाइनें गिरना, इसके बाद बाड़मेर और पाली जिले में बिजली लाइन-पोल गिरने की घटनाएं। यह तब है जब संभाग में बारिश का इतना प्रभाव भी नहीं है। लेकिन प्रसारण निगम इन नुकसान को मौसम पर ही डाल रहा है।

जो लाइनें गिरी सब काम ठेके पर हुआ

पिछले दो माह में प्रसारण निगम के जो पोल और लाइनें गिरी, वे पिछले 10-15 साल में ठेकेदारों की ओर से खींची गई। जबकि इससे भी पुरानी देचू-तिंवरी जैसी लाइन और पोल हैं, जो निगम कार्मिकों ने खड़े किए थे, वे अब तक सुरक्षित है।

एक करोड़ से अधिक का नुकसान

एक 220 केवी बिजली का पोल धराशायी होने पर करीब 5-7 लाख और 400 केवी पोल धराशायी होने पर 15 से 20 लाख का नुकसान होता है। पिछले दो माह में अब तक करीब 10 पोल 220 केवी और 2 पोल 400 केवी के गिरे हैं। इसके अलावा बड़ी लाइनें भी धराशायी हुई हैं। अब तक एक करोड़ से अधिक का औपचारिक आकलन है।

यहां धराशायी हो चुकी है लाइनें

जैसमेलर में 7 पोल व लाइनें 220 केवी व 1 पोल 400 केवी का धराशायी हुआ था। बाड़मेर जिले में 220 केवी के 2 व 400 केवी पोल व लाइन क्षतिग्रस्त हुई थी। पाली जिले में एक 220 केवी लाइन क्षतिग्रस्त हुई थी।

लोग होते हैं परेशान


यदि बड़ी लाइनें व पोल धराशायी होते हैं तो उन्हें ठीक करने में कई दिन का समय लग जाता है। जैसलमेर में 7 पोल पुन: खड़े करने में 4-5 दिन का समय लग गया। ऐसे में बिजली सिस्टम को या तो वैकल्पिक लाइनों पर डाला जाता है या फिर उस क्षेत्र से संबंधित कई गांव में बिजली ही नहीं पहुंचती। इसी प्रकार पाली में क्षतिग्रस्त लाइन जब तक ठीक हुई, तब तक 12 घंटे तक कई गांव अंधेरे में ही रहे।

इस प्रकार है प्रसारण सिस्टम


- 765 केवी के दो जीएसएस और 425 किलोमीटर लाइन।
- 400 केवी के 15 जीएसएस और 4 हजार किलोमीटर से अधिक लाइन।
- 220 केवी के 119 जीएसएस और 14 हजार किलोमीटर से अधिक लाइन।
- 132 केवी के 415 जीएसएस और 16 हजार किलोमीटर से अधिक लाइन।

इनका कहना है

पहले बिजली के पोल और लाइन खड़ी करने का काम प्रसारण निगम के कर्मचारी करते थे तो मजबूत काम आज तक टिका हुआ है। अब ठेके पर काम हो रहा है तो सप्लाई होने वाली सामग्री और काम की गुणवत्ता दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

- मंडलदत्त जोशी, कार्यकारी अध्यक्ष, प्रांतीय विद्युत मंडल मजदूर फेडरेशन राजस्थान इंटक

ठेकेदार की गलती वाली कोई बात नहीं है। उनकी जिम्मेदारी तो सिर्फ 18 माह की होती है। तेज हवाओं और मौसम की मार के कारण नुकसान होता है। निगम अपने स्तर पर ही नुकसान की भरपाई करता है।

- बी.पी चौहान, मुख्य अभियंता, राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड



from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2LdyzOI
Share on Google Plus

About Atul

This is a short description in the author block about the author. You edit it by entering text in the "Biographical Info" field in the user admin panel.

0 comments:

Post a Comment