आज भी आधे घरों में बगैर किचन के ही पक रहा है खाना, चौंकाने वाले हैं जनसंख्या से जुड़े ये आंकड़े

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जोधपुर. प्रदेश के करीब 49 फीसदी घरों में बगैर रसोई के ही खाना पकाया जाता है। प्रदेश के 90 प्रतिशत मकानों में घर के अंदर ही खाना बनाया जाता है, बावजूद इसके वहां रसोई जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं है। कहीं पत्थरों की चार दीवारी है तो कहीं खुले ही स्टोव रखकर सब्जी का छोंक लगाया जाता है। राज्य सरकार ने जून 2018 में सांख्यिकी वार्षिक पुस्तक-2017 जारी की। पुस्तक में प्रकाशित जनगणना 2011 के रसोई व ईंधन संबंधी डाटा के अनुसार प्रदेश में 1.25 करोड़ परिवार है। इसमें से 1.08 करोड़ परिवार घर के अंदर खाना पकाते हैं। इन एक करोड़ परिवारों में सें करीब 50 लाख के पास घर के अंदर रसोई घर की सुविधा नहीं है यानी ये इक्का-दुक्का कमरों में ही रहते हैं जहां अलग से रसोई की व्यवस्था नहीं है।

 

 

27 हजार परिवार नहीं पकाते खाना


प्रदेश के सवा करोड़ परिवारों में करीब 17 लाख परिवार ऐसे हैं जो चारदिवारी के बाहर खाना बनाकर खाते हैं। इसमें से 5.64 लाख परिवारों के पास घर के बाहर रसोई जैसी सुविधा है यानी बरामदे व घर के बाहर कौने में रसोई की व्यवस्था कर रखी है। वहीं 27 हजार 440 परिवार ऐसे हैं जो खाना नहीं पकाते हैं। इसमें से अधिकांश फुटपाथ पर रहते हैं।

 

एक तिहाई घरों में खाना अब भी जलावन लकड़ी से

- 35 फीसदी खाना बनता है जलावन लकड़ी यानी फायर वुड पर
- 50 फीसदी घरों में उपयोग में आती है एलपीजी
- 11 फीसदी घरों में खाना बनता है कृषि अपशिष्ट से
- 3 फीसदी घरों में गोबर के थेपले पर पकती है रोटी
- 0.9 फीसदी घरों में ही केरोसीन स्टोव पर बनता है खाना
- 0.1 प्रतिशत परिवार कोयले पर बनाते हैं खाना
- 0.1 फीसदी बायो गैस का करते हैं उपयोग
- 0.03 फीसदी परिवार इलेक्ट्रिक चूल्हे का भी करते हैं प्रयोग
- 0.2 फीसदी परिवार खाना ही नहीं पकाते

( वर्ष 2016 में उज्ज्वला योजना लागू होने के बाद दो साल में प्रदेश में करीब 30 लाख घरों में एलपीजी कनेक्शन दिए गए हैं।)

जनगणना 2021 की तैयारी शुरू


केंद्र सरकार ने जनगणना 2021 की तैयारी शुरू कर दी है। इसके अंतर्गत पहला परिपत्र हाल ही में हमारे पास आया है जिसमें नए बने जिले, गांव, तहसील या नाम बदलने वाले स्थानों का ब्यौरा मांगा गया है।

मोहनलाल पंवार, उपनिदेशक, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग जोधपुर



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