- राजकीय उम्मेद अस्पताल की गफलत
- दम्पती की चिन्ता : दूसरा बच्चा होने पर तीसरा मानकर नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी
- सरकारी योजनाओं से रहेंगे वंचित
के. आर. मुण्डियार
जोधपुर.
सरकारी अस्पतालों में प्रसव या उसके बाद किस तरह गफलत कर दी जाती है, इसका नमूना राजकीय उम्मेद अस्पताल में सामने आया है। दरअसल एक महिला ने यहां एक संतान को जन्म दिया, लेकिन अस्पताल के कार्मिकों ने ऑनलाइन रिकॉर्ड में दो जीवित संतान का जन्म होने की सूचना अपलोड कर दी। उसके भर्ती टिकिट व ममता कार्ड में एक ही संतान होना लिखा है। महिला एवं उसके पति की परेशानी यह है कि दूसरा बच्चा पैदा हुआ तो उसे सरकारी नौकरी, सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित रहना पड़ेगा, क्योंकि पहले से दो बच्चे दर्शाए जाने के कारण अब होने वाली संतान तीसरी मानी जाएगी। अब ऑनलाइन संशोधन के लिए दम्पती एक साल से अस्पताल के चक्कर काट रहा है।
चौपासनी रोड पठान कॉलोनी निवासी शोएब खान की पत्नी रुखसार ने उम्मेद अस्पताल में 15 फरवरी 2017 को पहली संतान एक पुत्री को जन्म दिया था। उस समय अस्पताल में ऑनलाइन डेटा फीडिंग के समय दो जीवित संतान दर्ज कर दिया। शोएब ने बताया कि आईसीएसडी की मातृवंदना योजना के तहत पहली जीवित संतान पर 5000 रुपए की सहायता सरकार से मिलती है, लेकिन दो संतान लिख दी गई।
दम्पत्ती के साथ ऐसे हुआ गलत व्यवहार
शोएब ऑनलाइन डेटा संशोधन के लिए अर्जी लेकर सबसे पहले डॉ. इन्द्रा भाटी के पास गए। उन्होंने कमला सिस्टर के पास भेजा। कमला सिस्टर ने ठीक से बात तक नहीं की और अर्जी पर अधीक्षक की सील लगवाकर लाने को कहा। अधीक्षक कक्ष के पास गए तो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी फोन पर बात कर रहा था, उसे अर्जी लेकर पटक दी और बोला, जाओ। वापस सिस्टर के वापस गए तो बाहर ही रोक दिया गया। अंदर कमरे में सिस्टर किसी से कह रही थी कि शायद जुड़वा बच्चे हुए होंगे एक मर गया होगा, पागल है।
कैसे मिले सरकारी नौकरी
शोएब का कहना है कि मैं और मेरी पत्नी सरकारी नौकरी के लिए तैयारी कर रहे हैं। ऑनलाइन डेटा में हमारे दो बच्चे पहले से ही दर्ज है। ऐसे में हम अब दूसरा बच्चा पैदा करते हैं तो सरकारी नौकरी नहीं कर सकेंगे ।
जयपुर से होगा करेक्शन
तकनीकी समस्या से डेटा गलत फीड हो गया होगा। करेक्शन जयपुर से ही हो सकता है। प्रार्थना पत्र जयपुर भेजेंगे। वहां से करेक्शन होते ही मैन्युअल चेक संबंधित को जारी कर देंगे। एेसी परेशानी के लिए जननी हेल्प डेस्क है। परिवादी इधर-उधर चक्कर काटने के बजाय डेस्क पर परेशानी बताए।
-डॉ. रंजना देसाई, अधीक्षक, राजकीय उम्मेद अस्पताल
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