जन्म देने वाली मां ने रेलवे ट्रैक पर फेंका, अब करोड़पति महिला स्वीडन में देगी 'कजरी'को नया जीवनदान

पोस्ट पसंद आये तो लाइक जरुर करे ?

नंदकिशोर सारस्वत/जोधपुर. मां ने विधाता की सौगात जिस नन्हीं परी 'कजरी' को रेलवे ट्रैक पर फैंक दिया था, किस्मत ने उसे स्वीडन पहुंचा दिया। 'कजरी' के मुकद्दर में ट्रेन के चक्कों के नीचे कुचल कर मरना नहीं बल्कि क्रिस्टिना का प्यार-दुलार लिखा था। किस्मत के अनूठे कनेक्शन को जोडऩे में समाजसेवी राजेन्द्र परिहार की भूमिका महत्वपूर्ण रही। बाड़मेर रेलवे स्टेशन के पास पटरियों के बीच स्लीपर पर 16 अगस्त 2017 को नवजात 'कजरी' को मरने के लिए फेंक दिया था। इसे कुदरत का करिश्मा कहें या संयोग, वहां से गुजरते एक शख्स ने बच्चे की किलकारी सुनी तो यकीन नहीं हुआ। पास जाकर देखा तो एक नवजात पड़ी थी। उसने तुरंत जाकर जीआरपी को सूचित किया।

जीआरपी ने मौके पर पहुंच 'कजरी' को संभाला और तुरंत बाड़मेर के राजकीय अस्पताल पहुंचाया। गंभीर स्थिति देखते हुए उसे जोधपुर रेफर किया गया। बाड़मेर पुलिस उसे लेकर जोधपुर के उम्मेद अस्पताल पहुंची। बालिका 'कजरी' की हालत में सुधार होने के बाद उसे अनाथ बच्चों को नया जीवन देने वाले नवजीवन संस्थान के संचालक राजेन्द्र परिहार को सुपुर्द कर दिया। संस्थान में तीन दिन की बालिका को 'कजरी' नाम दिया गया।

'कजरी' चौपासनी हाउसिंग बोर्ड स्थित नवजीवन संस्थान पहुंची तब उसका वजन डेढ़ किलो से भी कम था। संस्थान में अन्य अनाथ बच्चों के साथ उसका भी पालन पोषण होने लगा। इस बीच स्वीडन निवासी अविवाहित एलिन क्रिस्टन एरिसन (45) ने जब इंटरनेट पर 'कजरी' को देखा तो उसे अपनी बेटी बनाने का निश्चय किया। अंतरराष्ट्रीय दत्तक ग्रहण के लिए निर्धारित प्रक्रिया व मापदंड पूरे करने के बाद 23 जनवरी 2018 को औपचारिक आवेदन किया। वहां औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पारिवारिक न्यायालय जोधपुर में 14 जून को प्रार्थना पत्र पेश कर मंजूरी प्राप्त की। एलिन की वार्षिक आय 38 लाख, 14 हजार 119 यूएस डॉलर है।

 

जोधपुर में पहली बार आइसीए


स्वीडन की महिला एलिन की ओर से कजरी को गोद लेने का मामला जोधपुर में पहली बार इंटर कंट्री एडोप्शन का मामला होगा। गोद देने की पूरी प्रक्रिया भी पारिवारिक कोर्ट के मार्फत होगी। नवजीवन संस्थान के संचालक परिहार ने पत्रिका को बताया कि भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधीन सेन्ट्रल एडोप्शन रिसोर्स ऑथीरिटी के माध्यम से इंटर कंट्री एडोप्शन की प्रक्रिया पूरी होती है। इसमें भारतीय लोगों को अनाथ बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया अलग है। सख्त जांच प्रक्रिया से गुजरने के बाद 32 तरह के डॉक्युमेंट्स सौंपने पर ही बच्चा गोद दिया जाता है।



from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2O0mnn9
Share on Google Plus

About Atul

This is a short description in the author block about the author. You edit it by entering text in the "Biographical Info" field in the user admin panel.

0 comments:

Post a Comment