जस्टिस गुमानमल लोढ़ा एक पोस्टकार्ड को याचिका मान लेते थे

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जोधपुर . जस्टिस गुमानमल लोढ़ा की जोधपुर में प्रतिमा स्थापित की गई है। पंजाब के राज्यपाल वी पी सिंह ने उनकी प्रतिमा का अनावरण किया। क्या आप उनके बारे में जानते हैं? जस्टिस लोढ़ा एक नामी न्यायविद और विलक्षण व्यक्तित्व के धनी थे। वे अपने आप में एक संस्था थे। उन्होंने केवल एक पत्र को ही जनहित याचिका मान कर न्यायपालिका के इतिहास में एक मिसाल कायम की थी। यह उनकी न्यायिक सजगता का परिचायक था। अगर दूसरे शब्दों में कहें तो उन्होंने अपने न्यायाधीश कार्यकाल में अपरोक्ष रूप से सूचना के अधिकार को महत्व दिया था। यही वजह रही कि लोग यह सोचते थे कि अगर जस्टिस गुमानमल लोढ़ा को हाईकोर्ट में एक पत्र लिख दो और उन्हें न्याय मिल जाएगा।

शख्स एक रूप अनेक
वे सन 1926 में नागौर जिले में पैदा हुए थे। उन्होंने जोधपुर के जसवंत कॉलेज से बीकॉम और एलएलबी डिग्री के साथ स्नातक की उपाधि प्राप्त की थी। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया था और 1942 में उन्हें कैद कर लिया गया था। वह राजनीति में शामिल हो गए और 1 9 6 9 से 1 9 71 तक जनसंघ की राजस्थान राज्य इकाई के अध्यक्ष थे। वे राजस्थान विधान सभा के सदस्य और अध्यक्ष भी रहे। जस्टिस लोढ़ा 1 978 से १९88 तक राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश रहे।

कानून रक्षक
जस्टिस गुमानमल लोढ़ा सन 1988 मेंगुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने। वे तीन बार लोकसभा सदस्य बने। लोढ़ा भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति के सदस्य बने। उसके बाद वे अधीनस्थ विधान समिति के अध्यक्ष और कानून व न्याय मंत्रालय की परामर्श समिति के सदस्य रहे। जस्टिस लोढ़ा गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में सेवानिवृत्त हुए।

जीव रक्षक
वे देश में मूक पशुओं और विशेषकर गायों के संरक्षण के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने भारत के पशु कल्याण बोर्ड और मवेशी पर राष्ट्रीय आयोग के अध्यक्ष के रूप में विशिष्ट और उल्लेखनीय कार्य किया।

राष्ट्रीय पुरस्कार भी दिया जाता है

वे राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश और गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रहे। जस्टिस गुमानमल लोढ़ा लोकसभा के सदस्य भी रहे। उनके भाषणों में बौद्धिकता झलकती थी। वे पांच साल तक कैंसर से पीडि़त रहे और कालांतर 22 मार्च 2009 को उनकी अहमदाबाद में मृत्यु हो गई। उनके नाम पर न्यायमूर्ति गुमानमल लोढा मेमोरियल नेशनल अवार्ड के रूप में राष्ट्रीय पुरस्कार भी दिया जाता है।

 

 

 

 

 

 



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