जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने एनएचएआई और पीडब्लयूडी की ओर से हाईकोर्ट के नए भवन के सामने से गुजरने वाली रिंगरोड के छह लेन बनाने व रोड को पूरा करने में आ रही अडचनों पर नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट ने सम्बंधित विभागों के अधिकारियों को कहा कि बहाने बाजी छोडो और रिंग रोड का निर्माण जल्द पूरा करो। जस्टिस गोपालकृष्ण व्यास और दिनेश मेहता की खंडपीठ ने यह बात मंगलवार को शहर की यातायात व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट की ओर से एक दशक पूर्व जारी निर्देशों की पालना नहीं करने पर समाजसेवी महेन्द्र लोढा की ओर से दायर अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान कही।
सुनवाई के दौरान बताया गया कि वन विभाग से एनओसी नहीं मिलने से रिंगरोड का निर्माण शुरू नहीं किया जा सका। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि डांगियावास से चोखा तक जिस सड़क का निर्माण पूर्व में हो चुका है उसे मैंटेन करने अथवा पूर्व में की गई घोषणा के अनुसार न्यू हाईकोर्ट के सामने सिक्सलेन बनाने में क्या दिक्कत है। जबकि इसे मार्च 2018 के अंत तक पूरी करने का शपथ पत्र पेश कोर्ट में पेश किया गया था। खंडपीठ ने अधिकारियो से पूछा कि आप रिंगरोड या हाईवे पर आठ गुणा दस फीट की दुकानों का लाइसेंस जारी करते हो और यह नहीं देखते कि रिपेयरिंग, पंचर निकालने व ढाबों के सामने रोड पर हर समय आठ-दस ट्रक खड़े रहते हैं। यातायात पुलिस इस पर नियंत्रण क्यों नहीं करती।
ओवरब्रिज के नीचे बस स्टैंड
याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि रक्तियां भैरुजी स्थित वीर दुर्गादास मल्टी लेवल ओवर ब्रिज के नीचे ताज होटल की दीवार के सहारे सर्विस लेन पर अघोषित बस अड्डा बन गया है। इससे वाहनों को निकलने में दिक्कत होती है। इस पर खंडपीठ ने यातायात पुलिस से पूछा कि आप लोग क्या कर रहे हैं। खंडपीठ ने रिंगरोड, फलाईओवर तथा हाईराइज बिल्डिंगों सहित सभी मामलों में वृहत निर्देश जारी करने का कहा है।
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