आबकारी विभाग कार्मिकों ने धोखे से करवाए अफसर के दस्तखत, फिर कर डाली ये हेराफेरी

पोस्ट पसंद आये तो लाइक जरुर करे ?

गजेंद्र सिंह दहिया/जोधपुर. नकली व अवैध शराब जब्त करने वाले आबकारी निरोधक दल के स्वयं के कार्यालय में फर्जी रिकॉर्ड संधारण करने का मामला सामने आया है। विभाग की संस्थापना शाखा के विभिन्न कार्मिकों के रिकॉर्ड में हेराफेरी होने की आशंका है। हद तो तब हो गई, जब संस्थापना शाखा के प्रभारी ने 2011 में खुद द्वारा ली गई छुट्टियों को छह साल बाद चिकित्सकीय अवकाश में बदलवा दिया गया। फाइलों के बीच में कर्मचारी संधारण पुस्तिका आने पर अफसर पहचान नहीं पाए और हस्ताक्षर कर दिए। यह मामला अफसरों के ध्यान में आने के बाद जांच की गई। अतिरिक्त आबकारी आयुक्त ने आबकारी आयुक्त को रिपोर्ट भेजकर संस्थापना शाखा प्रभारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने व पुलिस में प्राथमिकी दर्ज करने की अनुशंषा की है।

 

55 की जगह 44 दिन का मेडिकल लीव

 

तत्कालीन जिला आबकारी अधिकारी खुशीराम मीणा के पास 2016-2017 में संभाग के आबकारी निरोधक दल का अतिरिक्त कार्य था। उस समय संस्थापना शाखा के प्रभारी लिपिक रतन सिंह ने कैशियर की फाइलों के बीच में स्वयं की कर्मचारी संधारण पुस्तिका भी पेश कर दी। मीणा ने जल्दबाजी में रतन सिंह की पुस्तिका में हस्ताक्षर कर दिए। इस हस्ताक्षर के द्वारा उसने जून 2011 में लिए गए 55 दिन के उपार्जित अवकाश में से 44 दिन के अवकाश को चिकित्सकीय अवकाश (मेडिकल लीव) में बदलवा दिया। बाबुओं की चतुराई यह भी रही कि केवल 44 दिन के अवकाश के ही कागज तैयार किए, क्योंकि 45 दिन का चिकित्सकीय अवकाश होने पर मेडिकल बोर्ड का प्रावधान होता है। फरवरी 2018 में मीणा को जानकारी मिलते ही उन्होंने तुरंत उच्चाधिकारियों को सूचित कर कोषालय में पत्र लिखकर भुगतान रुकवा दिया। मामले में जिला आबकारी अधिकारी-अभियोजन नूर मोहम्मद की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई। कमेटी द्वारा आरोप प्रमाणित करने के बाद पिछले सप्ताह अतिरिक्त आबकारी आयुक्त छगन श्रीमाली ने उदयपुर स्थित आबकारी आयुक्त को जांच रिपोर्ट भेजकर संबंधित कार्मिक के विरुद्ध विभागीय के साथ ही आपराधिक कार्रवाई की अनुशंषा की है।

कार्मिकों के रिकॉर्ड में फर्जी चिकित्सा प्रमाण पत्रों की आशंका


आबकारी विभाग के निरोधक दल कार्यालय में भी कुछ अन्य कर्मचारियों के रिकॉर्ड संधारण में भारी अनियमिताओं की आशंका है। सूत्रों के मुताबिक कुछ कार्मिकों की सेवा पुस्तिका में काटछांट व व्हाइटनर का प्रयोग किया गया। एक कार्मिक ने महात्मा गांधी अस्पताल के मेडिसिन वार्ड के एक डॉक्टर से इलाज करवाकर दूसरे डॉक्टर का फर्जी चिकित्सकीय प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर दिया। कई चिकित्सकीय प्रमाण पत्र केवल 30 से 44 दिन की छुट्टियों के ही हैं, ताकि मेडिकल बोर्ड से बचा जा सके। अवकाश लेखों और पेंशन में भी कारस्तानियां की गई हैं। सेवानिवृत्त होने पर सरकार द्वारा 300 छुट्टियों का पूरा भुगतान करने के लालच में कार्मिक यह तरीका अपना रहे हैं। ताज्जुब की बात यह है कि कार्यालय के अंतर्गत 102 कार्मिक आते हैं, लेकिन संस्थापना शाखा का कार्यभार अब भी दोषी लिपिक के पास ही है।

मैंने आयुक्त को रिपोर्ट भेज दी है

संबंधित मामले में रिकॉर्ड संधारण में हेराफेरी व फाइलों में गड़बड़ी की रिपोर्ट आबकारी आयुक्त कार्यालय उदयपुर भेज दी गई है। आगे की कार्रवाई वहीं से होगी।


छगन श्रीमाली, अतिरिक्त आबकारी आयुक्त, जोधपुर



from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2vbqtjR
Share on Google Plus

About Atul

This is a short description in the author block about the author. You edit it by entering text in the "Biographical Info" field in the user admin panel.

0 comments:

Post a Comment