जोधपुर
बच्चों के लिए दूध एक पौष्टिक आहार है और गरीब बच्चों को दूध नहीं मिलता है तो वे कमजोर रह जाते हैं और उनका सही तरीके से मानसिक विकास भी नहीं हो पाता। इसका उनकी पढ़ाई पर भी असर पड़ता है। नया सत्र शुरू होते ही स्कूलों में हर साल प्रवेशोत्सव का बोलबाला रहता है, लेकिन इस बार शिक्षा विभाग की ओर से कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को स्कूलों में ही दूध पिलाने के अभियान की सोमवार से शुरुआत हुई।
शिक्षा विभाग की ओर से जोधपुर जिले के सवा तीन हजार सरकारी स्कूलों में सोमवार से बच्चों को दूध पिलाने की अन्नपूर्णा दूध योजना का आगाज हुआ। कुड़ी भगतासनी सेंट्रल एकेडमी स्कूल के सामने राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय गांधी स्ट्रीट में सुबह 8 बजे अन्नपूर्णा दूध योजना की शुरुआत की गई।
पत्रिका टीम ने सुबह से ही नजर रखी
इस दौरान जोधपुर के कई स्कूलों में दूध आने, गर्म करने और बच्चों को दूध पिलाने तक हर पल पर पत्रिका टीम ने सुबह से ही नजर रखी। कहीं अध्यापक अध्यापिकाएं दौड़ते दौड़ते स्कूल पहुंचे तो कहीं बच्चे पहले पहुंच गए और टीचर्स देर से पहुंचे। इस दौरान कुछ स्कूलों में तो रोचक नजारे देखने को मिले। कहीं तो टीचर्स दूध की चाय बना कर पीते हुए भी नजर आए। एक स्कूल में बच्चों को दूध जलेबी का भी सेवन करवाया गया।
जिला स्तर पर शुुरुआत कुड़ी स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय गांधी स्ट्रीट से हुई।
दूध के साथ जलेबी भी खिलाई
समारोह के तहत बच्चों को दूध के साथ जलेबी भी खिलाई गई। हालांकि यह योजना जोधपुर जिले की सवा तीन हजार स्कूलों में एक साथ शुरू की गई, लेकिन समाचार है कि कई विद्यालयों में समय पर दूध भी नहीं पहुंचा। इस कारण कई शिक्षक दूध का इंतजार करते दिखे। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लूणी विधायक जोगाराम पटेल, विशिष्ट अतिथि सूरसागर विधायक सूर्यकांता व्यास, महापौर घनश्याम ओझा, जिला कलक्टर डॉ. रविकुमार सुरपुर, एडीएम मानाराम पटेल, डीडी प्रारंभिक धर्मेंद्रकुमार जोशी, डीडी माध्यमिक बंशीधर गुर्जर, डीईओ प्रारंभिक प्रथम धर्मेंद्रकुमार जोशी व द्वितीय ब्रह्मानंद शर्मा थे। डीईओ प्रारंभिक प्रथम धर्मेन्द्रकुमार जोशी ने बताया कि विद्यालय में दूध गर्म करने की जिम्मेदारी कुक कम हैल्पर की रहेगी।
कुछ खामियां नजर आईं
मंडोर स्थित मगजी की घाटी में दूध के पात्र धोने का कार्य बच्चों से करवाया गया और दूध डालने का कार्य अध्यापकों ने किया। वहीं गांधी स्ट्रीट में बच्चे दूध सर्व करते दिखे। यहां गिलास भी साफ नहीं थी। बच्चों का दूध ही स्टाफ ने चाय में काम लिया।
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