विकास चौधरी/जोधपुर. क्रिप्टो करंसी के रूप में विख्यात बिट कॉइन का ईजाद जापान के सतोषी नाकामोटो ने किया था। यह विकेन्द्रीकृत होने के साथ ही अनेक सेफ्टी फीचर से लैस है। हालांकि बिट कॉइन भारत में अवैध है, लेकिन कीमत बढऩे के बाद इसके समान अन्य क्रिप्टो करंसी के नाम पर आमजन से करोड़ों रुपए ऐंठे जा रहे हैं। दिल्ली की एक कम्पनी के निदेशक ने एडीसीएन के नाम से नई क्रिप्ट करंसी बनाकर जोधपुर के एक व्यक्ति से लाखों रुपए ऐंठ लिए। महामंदिर थाने के मामले में निदेशक सहित तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार कर रिमाण्ड लिया गया, लेकिन इस दौरान निदेशक की उसके भाई से बात कराने और पुलिस पर गम्भीर आरोप लगाए जाने के बाद पुलिस मुख्यालय ने जांच को सीआईडी सीबी को सौंप दी है। सिपाही को भी लाइन हाजिर कर दिया गया है।
यह है मामला
मण्डोर क्षेत्र निवासी नरेन्द्र गहलोत ने महामंदिर थाने में दो मामले दर्ज करवा रखे हैं। एक में उसने पांच लाख रुपए के बिट कॉइन चोरी का आरोप लगाया है। इस मामले में जोधपुर निवासी रमेश पॉल को गिरफ्तार किया जा चुका है। दूसरे मामले में उसने बिट कॉइन के समान दूसरी क्रिप्टो करंसी एशिया डिग्री कॉइन (एडीसीएन) में निवेश के नाम पर लाखों रुपए ऐंठने का आरोप लगाया है। मामले की जांच कर रहे सहायक पुलिस आयुक्त व आईपीएस अधिकारी सुधीर चौधरी ने गत दिनों मूलत: हरियाणा हाल दिल्ली निवासी एडीसीएन के निदेशक इन्द्रजीत यादव, मार्केटिंग करने वाले अभिषेक श्रीवास्तव और जोधपुर निवासी रमेश पॉल को गिरफ्तार किया था। तीनों को रिमाण्ड पर लेने के बाद न्यायिक अभिरक्षा में भिजवा दिया गया है। मामले की जांच सीआईडी सीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सीताराम को सौंप दी गई है।
ऐसे रची धोखाधड़ी की साजिश
बिट कॉइन के भाव आसमान छूने के बाद इन्द्रजीत यादव ने एसीडीएन नामक नई क्रिप्टो करंसी शुरू की। सीसीईएक्स एक्सचेंज में उसको रजिस्टर्ड कराया गया। फिर 70 लाख रुपए कॉइन हैकिंग की। मार्केटिंग कर रहे अभिषेक श्रीवास्तव को 2.5 करोड़ की करंसी बाजार में चलाने के लिए दे दी। इसके बाद उसने ईथर वॉयलेट नामक नई क्रिप्टो करंसी शुरू कर दी और बाजार में 2.5 करोड़ की जगह 21 करोड़ रुपए में करंसी दिखा दी थी। उसने 2.5 करोड़ में से एक करोड़ रुपए खुद के पास रख लिए थे, जबकि क्रिप्टो करंसी में निवेश के लिए बाजार में कोई प्रयास नहीं किए गए। फिर वे लोगों से निवेश के नाम पर ठगी करने लग गए। जोधपुर के रमेश पॉल ने नरेन्द्र गहलोत से 25 लाख रुपए ऐंठ लिए थे।
थाने के फोन से आरोपी की भाई से बात कराई, लाइन भेजा
सीआईडी सीबी को जांच सौंपे जाने से पहले जांच कर रहे एसीपी व प्रशिक्षु आईपीएस सुधीर चौधरी ने निदेशक इन्द्रजीत यादव, अभिषेक श्रीवास्तव व रमेश पॉल को गिरफ्तार किया था। रिमाण्ड अवधि के दौरान एसीपी कार्यालय के एक सिपाही ने थाने के लैण्डलाइन फोन से यादव की उसके भाई से बात करवा दी। उसने पुलिस पर प्रताडि़त करने और अवैध वसूली का प्रयास करने के आरोप भी लगाए। भाई ने मोबाइल में बातचीत की रिकॉर्डिंग का ऑडियो पेश कर दिया। इस पर मामले की जांच पुलिस की बजाय सीआईडी सीबी को सुपुर्द कर दी गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सीताराम माहेच को जांच सौंपी गई है। मुख्य आरोपी की भाई से बात कराने वाले सिपाही प्रेमसुख को लाइन हाजिर कर दिया गया है। जांच के आदेश भी दिए गए हैं।
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