जोधपुर.
सोमवार रात को करीब 2 बजे थे। तभी अचानक अस्पताल के बच्चों के आईसीयू वार्ड में हड़कम्प मच गया। अर्धनिन्द्रा में डूबे बच्चों के परिजन भी घबरा गए कि ये क्या हो गया। परिजन कुछ समझने की कोशिश करते, उससे पहले ही अस्पताल कर्मचारी बोले, यहां बोतल से केमिकल फैल गया है, जल्दी से बच्चों को दूसरे आईसीयू में शिफ्ट करो। बच्चों के परिजन कुछ बोलने की हिम्मत जुटा नहीं पाए, लेकिन कर्मचारियों की हड़बड़ाहट से पूरा हालात की गंभीरता जरूर समझ गए और अपने-अपने बच्चों की सुरक्षा देते हुए उन्हें गोदी में उठाकर जल्दी से दूसरे वार्ड में चले गए। जो बच्चे ज्यादा गंभीर थे, उन्हें नर्सिंगकर्मियों ने संभाला। दूसरे वार्ड में सुरक्षित पहुंचकर परिजन भगवान का शुक्रिया अदा कर रहे थे। लेकिन थोड़ी देर एक बच्चे की मृत्यु हुई तो परिजन और अधिक घबरा गए, उन्हें यह डर बैठ गया कि कहीं उनके लाल को भी कुछ न हो जाएं। नर्सिंगकर्मियों ने उन्हें धैर्य बंधाया कि ऐसा कुछ नहीं हुआ, अब सबकुछ ठीक है।
आधी रात बाद ऐसे घबराहट, अफरातफरी व के हालात संभाग के सबसे बड़े मथुरादास माथुर अस्पताल के जनाना विंग में दिखाई दिए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जनाना विंग में बीती रात दो बजे शिशु रोग आईसीयू की फर्श पर केमिकल गिरने से अफरातफरी मच गई। आनन-फानन में आईसीयू के बच्चों को दूसरे आईसीयू में शिफ्ट किया गया। दूसरे आईसीयू में शिफ्ट हुए बच्चों में से एक बच्चे की मृत्यु होने से हंगामा मच गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रात करीब दो बजे एमडीएम जनाना विंग के शिशु रोग आईसीयू में रेक पर रखी फॉरमेलिन केमिकल की 500 ग्राम की बोतल नीचे गिर गई। इससे फॉरमेलिन फर्श पर फैल गया। फॅारमेलिन की बदबू फैलने से आंखों में जलन की शिकायत हुई। आईसीयू में 16 बच्चों समेत मेघवालों की ढाणी सुवालिया निवासी नक्ताराम का डेढ़ वर्षीय बालक सुन्दर भी भर्ती था। जिसकी स्थिति बेहद गंभीर थी। इस पर वार्ड प्रभारी हुकमचंद चौहान व रात्रिकालीन नर्सिंग पर्यवेक्षक अरविन्द कुमार रोत ने अस्पताल कर्मियों की मदद से आईसीयू में भर्ती सभी 16 बच्चों को पास ही दूसरे आईसीयू में शिफ्ट कर दिया। अचानक सभी बच्चों के दूसरे वार्ड में शिफ्ट करने की बात पर परिजन भी घबरा गए। शिफ्टिंग के कुछ समय पश्चात यानि रात करीब पौन 3 बजे बालक सुन्दर की मृत्यु हो गई। कुछ लोगों का आरोप रहा कि संभवत: शिफ्टिंग के समय मरीज बच्चे के मुंह से ऑक्सीजन आदि किट हट गया। इससे उसकी मृत्यु हो गई। हालांकि परिजन की ओर से अस्पताल प्रशासन को सुन्दर की मृत्यु संबंध में कोई शिकायत नहीं दी गई। रात को केमिकल गिरने की घटना के बाद मंगलवार दोपहर तक हड़कम्प मच रहा।
सवाल : स्टोर से बाहर कैसे आया फॉरमेलिन ?
एक्स्पर्ट के अनुसार फॉरमेलिन वार्डों के फ्यूमिगेशन व सफाई में काम आता है। अस्पतालों में सभी वार्डों के स्टोर में रखा होता है। इसका उपयोग वार्ड के खाली रहने पर ही किया जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आईसीयू में नाजुक हालत वाले बच्चों के भर्ती रहने के दौरान यह स्टोर से बाहर कैसे आया? किस कर्मचारी ने इसे बाहर लाकर रख दिया ? कहीं न कहीं लापरवाही तो हुई है।
यह बोली तथ्यात्मक रिपोर्ट-
घटना के संबंध में अस्पताल अधीक्षक डॉ. एमके आसेरी ने शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. जेपी सोनी से तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की। सोनी की ओर से पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार जिस बच्चे की मृत्यु हुई, उसे 28 जुलाई को मस्तिष्क ज्वर की गंभीर बीमारी के कारण आईसीयू में भर्ती किया गया था। उसका ब्रेनडेड हो चुका था। केमिकल गिरने से पहले रात साढ़े 12 बजे बच्चे को सीपीआर दी जा चुकी थी। उसके बचने की संभावना कम थी। केमिकल गिरते ही सबसे पहले उसी बच्चे को दूसरे आईसीयू में एम्बूबैक के साथ शिफ्ट किया। काफी समय बाद उसकी मृत्यु हुई।
इनका कहना है-
आईसीयू में सफाई में काम आने वाला केमिकल गिर गया था। इसलिए सभी बच्चों को दूसरे आईसीयू में शिफ्ट किया गया। बच्चे सुन्दर की मृत्यु शिफ्ट करने के बाद हुई। उसे केमिकल गिरने से पहले ही सीपीआर दी जा चुकी थी। उसका ब्रेनडेड था। परिजन को पहले ही बता दिया था कि उसके बचने की संभावना नहीं है। बच्चे की मृत्यु पर परिजन की कोई शिकायत नहीं है। फिर भी जो केमिकल गिरा, इस संबंध में संबंधित से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है।
-डॉ. एम. के. आसेरी, अधीक्षक, राजकीय मथुरादास माथुर अस्पताल, जोधपुर
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal https://ift.tt/2mXqiVo
0 comments:
Post a Comment