Thar Desert: 17 साल बाद फिर आंधी का मौसम

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जोधपुर. करीब दो दशक बाद इस साल उत्तर-पश्चिमी भारत में महीने भर तक धूलभरी हवा या आंधी का मौसम बना रहा। मौसम विभाग, आईआईटी भुवनेश्वर, काजरी सहित देश के विभिन्न संस्थान मौसम में हुए इस बदलाव का अध्ययन कर रहे हैं। इसमें सामने आया कि भूमध्ययागर से आने वाले पश्चिमी विक्षोभ की तीव्रता गर्मी के मौसम में बढऩे की वजह से हवा तेजी से चली, जिसके कारण भारत के साथ पाकिस्तानी मरुस्थल की धूल उडक़र राजस्थान के साथ पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, चण्डीगढ़, पश्चिमी उत्तरप्रदेश यहां तक की हिमाचल प्रदेश तक पहुंच गई। हवा में धूल भरे एयरोसॉल के कारण वैज्ञानिकों ने इस बार प्री मानसून बरसात अधिक होने की संभावना जताई है।

हवा धीमी पड़ी, हरियाली बढ़ी

उड़ीसा स्थित आईआईटी भुवनेश्वर के पृथ्वी, समुद्र व जलवायु परिवर्तन स्कूल की ओर से किए गए शोध के मुताबिक वर्ष 2001 से लेकर 2015 तक आसमान में एयरोसॉल की मात्रा में धूल कम हो गई। सतह से 16 से 18 किलोमीटर ऊंचाई तक एयरोसॉल के बादल है, लेकिन उसमें मानवजनित प्रदूषक अधिक है। धूल का मुख्य स्रोत थार मरुस्थल व पाकिस्तान है। इसके लिए पाकिस्तान स्थित कराची, लाहौर व उत्तरप्रदेश के कानपुर के ग्राउण्ड बेस्ड डाटा का अध्ययन किया गया। डाटा के मुताबिक जयपुर में वर्ष 2000 से लेकर अब तक हर साल ३ फीसदी की दर से धूल में कमी आई है। जयपुर थार मरुस्थल के नजदीक है। उधर, कानपुर में यह कमी 0.5 फीसदी प्रति वर्ष है। धूल भरे एयरोसॉल में यह कमी राजस्थान में डेढ़ दशक में सिंचित क्षेत्रफल बढऩे, थार मरुस्थल में हरियाली आने व हवा की गति मंद पडऩे के कारण हुई है। बरसात की तीव्रता बढऩे से धूल जमीन के साथ चिपकी हुई है। हवा की औसत गति 60 से घटकर 30 किलोमीटर प्रति घण्टा रह गई है।


इस साल सर्दी में नहीं हुई मावठ
राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ से सर्दियों में होने वाली बरसात को मावठ कहते है, जो रबी की फसल के लिए वरदान होती है। इस साल पश्चिमी विक्षोभ की तीव्रता घटने से सर्दी में बरसात नहीं हुई। उलटा गर्मियों में इसकी तीव्रता बढ़ गई, जिससे थण्डरस्ट्रॉम पैदा हो गए और धूल भरी हवा के साथ तेज बरसात देखने को मिली।


पश्चिमी विक्षोभ एक कारण हो सकता है

इस साल धूलभरी हवा की तीव्रता आश्चर्यजनक रूप से बढ़ गई है। मौसम में हुए इस बदलाव को लेकर शोध कर रहे हैं। प्रारंभिक तौर पर सामने आया कि पश्चिमी विक्षोभों के कारण मौसम में बदलाव हुआ है।
डॉ. विनोज वी, जलवायु परिवर्तन, समुद्र व पृथ्वी स्कूल, आईआईटी भुवनेश्वर



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