- इकाइयों से निकलने वाले पानी बह रहा सड़कों पर
जोधपुर . नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सख्ती के बावजूद शहर के औद्योगिक क्षेत्रों के हालात नहीं सुधरे हैं। अब भी टैक्सटाइल व स्टील इकाइयों से रासायनिक पानी सड़कों पर छोड़ा जा रहा है। एक-दो नहीं बल्कि दर्जनों फैक्ट्रियों के संचालक पर्यावरण को दूषित करने के साथ ही लोगों के स्वास्थ्य को भी खतरे में डाल रहे हैं। गौरतलब है कि एनजीटी ने इसी सप्ताह प्रदूषण फैलाने वाली 19 इकाइयों को बंद करने के आदेश दिए गए हैं।
इन क्षेत्रों में हो रही है धुलाई
शोभावतों की ढाणी, जुनावों की ढाणी, लूणी, सालावास, सांगरिया, हैवी इंडस्ट्रियल, लाइट इंडस्ट्रियल, न्यू पावर हाउस, बासनी प्रथम व द्वितीय फेज क्षेत्रों मे औद्योगिक इकाइयां हैं। इन क्षेत्रों में ऐसी कई इकाइयां हैं, जिनसे तय मानक से अधिक मात्रा में रसायनयुक्त पानी छोड़ा जा रहा है।
लीकेज बड़ा कारण
औद्योगिक क्षेत्रों में इकाइयों की पाइप लाइन जेपीएनटी की पाइप लाइन से जुड़कर ट्रीटमेंट प्लांट तक जाती है। जेपीएनटी की पाइप लाइनें व मैनहॉल क्षतिग्रस्त हैं। इससे इकाइयों से निकलने वाला सारा पानी ट्रीटमेंट प्लांट तक नहीं पहुंच रहा है। यह दूषित पानी लीक होकर सड़कों पर बह रहा है या रीको के नाले से होता हुआ जोजरी नदी में जा रहा है। इससे नदी क्षेत्र प्रदूषित हो रहा है व आसपास के खेत बंजर हो रहे हैं।
जेपीएनटी को बताया विफल एजेंसी
एनजीटी की ओर से प्रदूषित औद्योगिक इकाइयों के निरीक्षण के लिए नियुक्त कोर्ट कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट में जेपीएनटी को विफल एजेंसी बताया। रिपोर्ट में कहा गया है कि जेपीएनटी इकाइयों की पाइप लाइनों से आने वाले पानी को उपचारित करने में विफल रहा है।
कनेक्शन कटने शुरू
एनजीटी की ओर से 30 मई को 19 फैक्ट्रियों को बंद करने की अनुपालना में शनिवार को फैक्ट्रियों के बिजली कनेक्शन कटने शुरू कर दिए गए। एनजीटी ने व्यवस्थाएं नहीं सुधारने तक इन फैक्ट्रियों के बिजली कनेक्शन काटने के आदेश दिए हैं।
औद्योगिक क्षेत्रों में जहां-जहां जेपीएनटी की पाइप लाइनें टूटी हुई हैं, उनको दुरुस्त करवाया जाएगा। हैवी इंडस्ट्रियल एरिया में नई पाइप लाइन का काम शुरू करवा दिया गया है।
जसराज बोथरा, मैनेजिंग ट्रस्टी, जेपीएनटी
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