वोट बैंक की राजनीति से सिमटने लगी जोजरी नदी!

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राजेश मेहरडा
पीपाड़सिटी (जोधपुर). मानसून के मौसम में कई महीनों तक बहकर क्षेत्र को हरियाली की चादर ओढ़़ाने वाली जोजरी नदी समय के साथ सिमटकर रह गई है। वोट बैंक की राजनीति के चलते कहीं अतिक्रमण तो कहीं सरकार की नीति के कारण जोजरी नदी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ते हुए दफन होने के कगार पर है।

 

पीपाड़सिटी क्षेत्र में जोजरी नदी खवासपुरा, चौकड़ी कलां, कोसाणा, मालावास, जालीवाड़ा, नानण, पीपाड़सिटी सहित अन्य गांवों के लिए कृषि उत्पाद में वरदान रही। आज यह नदी गुमनामी की गर्त में समाने लगी है।


आनासागर झील से जुड़ी जोजरी नदी

क्षेत्र की बरसाती नदी जोजरी अजमेर की आनासागर झील से जुड़ी है। मानसून के मौसम में आनासागर के छलकने के बाद जोजरी नदी बहा करती थी। इस नदी के कारण भूजल स्तर भी बढ़ता था। कुओं और नलकूप के बनने से इसके दोनों तरफ लहलहाती फसलें विकास की गाथा का बखान करती थी, लेकिन आज यह बंजर क्षेत्र की सूखी नदी बन गई है, जो वर्षों से मानसून में भी बहने का सपना देख रही है।

 

 

खतरे में जोजरी नदी का अस्तित्व

बरसाती नदी जोजरी का अस्तित्व खतरे में है। जलग्रहण विकास के नाम पर जगह-जगह एनीकट बना देने से पानी की आवक बंद हो गई है। इसके साथ ही सरकार की ओर से नदी में बजरी खनन का ठेका देने और अवैध खनन से इसका तल निकल आया है। इस कारण भारी बारिश से भी इसमें जल प्रवाह नही होता है।

 

 

विकास की बलि चढ़ी नदी

जोजरी नदी राज्य सरकार व स्थानीय निकायों की उदासीनता की शिकार बन गई। पीपाड़सिटी शहरी व ग्रामीण क्षैत्रों में जोजरी नदी में अतिक्रमण कर लोगों ने अवैध निर्माण कर लिए जिन्हें हटाने के बजाय चुनावों के समय विकास दर्शाने और वोट बैंक बढ़ाने के लिहाज से अतिक्रमियों को पट्टे बनाकर थमा दिए। शहरी क्षेत्र में जोजरी नदी का दायरा इसके केंद्र से दोनों तरह पांच-पांच सौ मीटर का है, जो आज पचास मीटर से भी कम हो गया है।

 

उच्च न्यायालय के आदेश फाइलों में दफन

राजस्थान उच्च न्यायालय ने अब्दुल रहमान बनाम सरकार की याचिका के निर्णय में सन् 1955 की स्थिति बहाल कर नदी नालों को संरक्षित करने का आदेश दे रखा है। लेकिन सरकार और स्थानीय निकाय उसकी पालना की बजाय आदेश पर कुंडली मार न्यायालय को ही ठेंगा दिखाकर भ ूमाफिया के नदी को बेचने-खरीदने के खेल में शामिल होकर मालामाल बन रहे हैं।

 

 

इन्होंने कहा
नदी के संरक्षण का दायित्व संबंधित ग्राम पंचायतों व नगर पालिका का है। उनको नदी में अतिक्रमियों को बेदखल करने के साथ निर्मित भवनों को ध्वस्त करने का कानूनी अधिकार प्राप्त है।
-रिछपाल सिंह बुरड़क, उप जिला कलक्टर, पीपाड़सिटी।



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