जोधपुर में बिल्डिंग हादसे के बाद निगम व आवासन मंडल यूं बच रहे है जिम्मेदारी से

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धडल्ले से हो रहे है अवैध निर्माण

जोधपुर. आवासन मण्डल और नगर निगम में खींचतान के चलते शहर की सबसे बड़ी आवासीय कॉलोनी चौपासनी हाउसिंग बोर्ड में धड़ल्ले से अवैध निर्माण किए जा रहे हैं। कोई भी सरकारी एजेंसी अवैध निर्माण रोक की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। चौपासनी हाउसिंग बोर्ड के सेक्टर 21 में निर्माणधीन दुकान की छत गिरने के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया चौपासनी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी का धणीधोरी आवासन मण्डल है या नगर निगम।
आवासन मण्डल का कहना है कि वह सन् 2006 में ही यह आवासीय कॉलोनी नगर निगम को हस्तांतरित कर चुका है। जबकि महापौर घनश्याम दाधीच का कहना है कि आवासन मण्डल ने हमें फाइलें नहीं सौंपी। निगम को किसी भी सेक्टर के किसी भूखण्ड के बारे में जानकारी नहीं है। हालांक निगम के सूत्रों ने बताया कि अनुसार सन् 2010-11 से चौपासनी हाउसिंग बोर्ड में क्षेत्र में निर्माण कार्य की अनुमति दी जा रही है। जब्त किया सामान निगम के दस्ते ने मंगलवार को हादसे के बाद मौके से निर्माण सामग्री व अन्य संसाधन जब्त कर लिए। 25 मई को भी अतिक्रमण प्रभारी ने यहां से निर्माण सामग्री जब्त की थी। इसके बाद भी निर्माण कार्य जारी रखा गया। अब निगम का कहना है कि आस-पास की अन्य दुकानों को भी नोटिस जारी किए जाएंगे।

 

जिम्मेदार कौन
आवासीय अभियंता - आवासन मंडल के आवासीय अभियंता को पता रहता है कि कौनसा क्षेत्र आवासीय है और कौनसा व्यावसायिक। इन क्षेत्रों में चल रहे निर्माण कार्यों के बारे में जानकारी रखने की जिम्मेदारी भी आवासीय अभियंता की है।

अतिक्रमण प्रभारी - आवासन मंडल के अतिक्रमण निरोधक दस्ते के प्रभारी पर अवैध निर्माण पर नजर रखने का दायित्व है। दस्ते के प्रभारी को सूचना देकर कार्य रुकवाना चाहिए था।

 

भूखंड मालिक - बिना अनुमति के निर्माण के चलते मुख्य दोषी भूखंड मालिक ओम प्रकाश जैन की है।
वार्ड प्रभारी- नगर निगम के वार्ड प्रभारी का दायित्व है कि वार्ड में हो रहे निर्माण की जानकारी रखे और अवैध निर्माण होने पर उसे रुकवाए।

 

जांच करेंगे

हम यह कॉलोनी नगर निगम को हैंडऑवर कर चुके हैं। वैसे निर्माण की अनुमति आवासन मण्डल और नगर निगम भी देता है। इस मामले में जांच की जाएगी कि निर्माण की अनुमति किसने दी।

नरेन्द्र बोहरा, उपआवासन आयुक्त वृत्त प्रथम

 

जानकारी नहीं

यह कॉलोनी निगम को सौंपी जा चुकी है। मेरी जानकारी में नहीं है कि कहां क्या निर्माण चल रहा है।

सीआर बिशेन, आवासीय अभियंता

आवासन मंडल ने निगम को कॉलोनी हस्तांतरित की लेकिन फाइलें नहीं दी। जब फाइलें ही नहीं हैं तो निर्माण अनुमति निगम किस आधार पर दे। इसलिए निगम निर्माण की अनुमति नहीं देता। जब निर्माण की अनुमति आवासन मण्डल दे रहा है तो अवैध निर्माण का ध्यान भी वही रखे।
-घनश्याम ओझा, महापौर

 

नाम हस्तांतरण के बाद एकल खिड़की पर आने वाली फाईल पर निगम से आवासीय अनुमति दी जा रही है। आवासन मंडल के टाईप डिजाईन के अनुसार ही अनुमति दी जाती है। 2010-11 से अनुमति जारी हो रही है।
-प्रदीप बोड़ा, प्रभारी भवन निर्माण अनुमति एकल खिड़की



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