देश मेें  इमरजेंसी और हीराचंद बोहरा का परिवार  : संस्मरण देवराज बोहरा

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जोधपुर
आपातकाल के वो काले दिन मैं कभी नहीं भूल सकता। देश में 25 जून 1977 को आपातकाल की घोषणा के तुरंत बाद पुलिस अद्र्धरात्रि में घर पर आई और घर को घेर लिया, जब दरवाजा खटखटाया तो मेरे बड़े भाई पुखराज बोहरा ने दरवाजा खोला।पुलिस घर में घुस गई और बार-बार पूछने पर बिना बोले, सभी कमरों में झांकने लगी, एेसा लगा कि पुलिस कुछ ढूंढ रही है, पर क्या? यह समझ में नहीं आया। बहुत देर ढूंढने के बाद भी कुछ नहीं मिला तो कहा- हीराचंद जी कहा हैं? तब हमने बताया- वो जोधपुर से बाहर गए हैं, फि र पूछताछ करने पर पता लगा कि सरकार ने आपातकाल की घोषणा कर दी है और सभी राजनेताओं और संघ के पदाधिकारियों की धर पकड़ हो रही है। दूसरे दिन सुबह पता लगा कि दामोदर जी बंग को रात्रि में पकड़ कर सेन्ट्रल जेल भेज दिया है और भी कई लोगों को पकडऩे के समाचार मिल रहे थे। क्योंकि उस दिन न्यूज पेपर ब्लैक ब्लैक और खाली थे।

गले में मैं देश द्रोही हूँ की तख्ती लगा कर घुमाया

पूरे शहर में आपातकाल के कारण जो जो सरकार के खिलाफ कदम उठा रहे थे, जैसे जनसंघ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों की धरपकड़, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबन्ध, इंदिरा गांधी मुर्दाबाद कहने वालों को गिरफ्तार कर जेल भेजना, उनके गलों में मै देश द्रोही हूं, की तख्ती लगा कर सरे-बाजार काला मुंह कर घुमाना और लोगों के सामने जलील करना, युवाओं के सिर मूंडना, सिर पर उस्तरे से चौराहा बनाना, आम जन को पकड़ कर जबरदस्ती नसबंदी करवाना, अतिक्रमण के नाम पर लोगों की दुकानें या घर तुड़वाने जैसे दहशत भरे कामों से आम आदमी भयभीत था।

राष्ट्रीय स्तर पर विचार हुआ
इस वातावरण को ठीक कैसे किया जाए और लोग भय मुक्त कैसे हों, उस पर राष्ट्रीय स्तर पर विचार हुआ और यह निश्चय किया कि देश भर में आंदोलन किया जाए और उसकी कड़ी में जोधपुर में किशन भैया जी, सत्यपाल हर्ष और और हीराचंद बोहरा ने इसकी योजना बना कर पूरे संभाग में आंदोलन की रचना की और आंदोलन शुरू किया। आंदोलन की कड़ी में मैंने (देवराज बोहरा ने) भी आंदोलन किया। कटला बाजार से जुलूस प्रारंभ हुआ, तानाशाही शासन के विरुद्ध नारे, भारत माता की जय, इंदिरा गांधी मुर्दाबादएके नारे लगाने पर और थोड़ा आगे चलने पर पुलिस ने मुझे (देवराज बोहरा को) गिरफ्तार कर लिया और वहां से सेन्ट्रल जेल भेज दिया। संघ की योजना के कारण मुझे कोर्ट से एक माह बाद जमानत मिल गई और मैं घर आया, तब उस रात पुलिस ने मेरे पूरे घर को घेर लिया और फि र घर के हर कमरे की तलाशी ली। पुलिस मेरे दो भाइयों को गिरफ्तार कर पुलिस थाना डिविजन डी में ले गई और 15 दिन तक दोनों भाइयों पुखराज बोहरा और मेरा छोटा भाई निर्मल बोहरा को पुलिस थाना में बिना एफआईआर के रखा, जहां उन्हें हाथों व डण्डो से पीटा गया और यह जानने की कोशिश की गई कि पत्रक वितरण जो हो रहे हैं, वो कहां से हो रहे हैं़? और उन्हें कैन बंटवाता है? वो हमसे हमारे पिता हरीाचंद बोहरा के बारे में भी जानकारी लेना चाहते थे कि वे कहां रहते हैं? और यह भी कि उनके साथ कौन-कौन है, लेकिन उन्हें हमारे दोनों भाइयों से कोई जानकारी नहीं मिल पाई। तब उन्होंने मेरे बडे़ भाई पुखराज बोहरा व छोटे भाई निर्मल बोहरा को छोड़ दिया।

दमनचक्र यहीं पर नहीं रुका

भाई पुखराज व निर्मलकुमार के घर पहुंचने के बाद दमनचक्र यहीं पर नहीं रुका, फि र पुलिस ने उसी दिन आधी रात को मेरे घर को घेर लिया और फि र दमन का तांडव शुरू हो गया। उस दिन मेरी माताजी हुलासकंवर ने दरवाजा खोला और कहा कि क्या चाहिए ? तो पुलिस ने उन्हें धक्का दिया? धक्का देने से मेरी माता जी के सिर में चोट आई। इसे अनदेखा कर पुलिस अधिकारी घर में घुस गए। मेरे छोटे भाई निर्मल के कुछ तेज बोलने पर बाल पकड़ कर उसे पीटना शुरू कर दिया। हो हल्ला सुन कर हमारे पड़ोस में स्थित मकान में एक सीएमएचओ राजकुमारी जी रहती थीं, वो दौड़ कर आईं, बीच बचाव किया। तब पुलिस ने उन्हें छोड़ा। राजकुमारी जी के पूछने पर पुलिस अधिकारी ने बताया कि हमें हीराचंद बोहरा और देवराज बोहरा की जरूरत है, उनसे पूछताछ करनी है और उनके खिलाफ मीसा के वारंट हैं। ये लोग उनके बारे में बताते नहीं और हम पर ऊपर से बहुत प्रैशर है। मेडिकल अधिकारी ने उन्हें फ टकारते हुए कहा- घर में महिलाए हैं उनसे केसे व्यव्हार करना चाहिए, उनका आपको ख्याल नहीं है? इस प्रकार की जोर जबरदस्ती ठीक नहीं ???

उस दिन पुलिस वहां से चली गई

उनके डांटने से उस दिन पुलिस वहां से चली गई, लेकिन बार-बार घर को घेर कर घर की महिलाओं को प्रताडि़त करती रही। एक दिन मैं जोधपुर सीजेएम कोर्ट में तारीख पेशी पर कोर्ट गया। मैं उस दिन कोर्ट में पेशी पर पहुंचा ही था कि तभी अचानक वहां पुलिस पहुंच गई और मुझे कोर्ट से घसीट कर बाहर ले जाने लगी। तब मैं जोर से चिल्लाया तो पूरा कोर्ट मेरी और देखने लगा। मैंने जोर से कहा मुझे कोर्ट से बिना कारण पकड़ कर ले जा रहे हैं? तब कोर्ट ने पुलिस अधिकारी पर अदालत की मानहानि का केस बनाया और पुलिस अधिकारी को बुलाया और मुझे हाजिर करने के लिए कहा। इस पर पुलिस अधिकारी एसआई मांगीलाल ने कोर्ट में बताया कि देवराज बोहरा के खिलाफ मीसा का वारंट है और इसलिए देवराज बोहरा को गिरफ्तार किया है। कोर्ट ने कंटेम्प्ट की तारीख देते हुए जवाब पेश करने के लिए कहा और देवराज बोहरा को सेन्ट्रल जेल भेजने के आदेश दिए।

बच्चो को बार-बार थाना ले जाकर प्रताडि़त करने लगे

भूमिगत आन्दोलन के तहत सफल संचालन से परेशान पुलिस प्रशासन ने कई बार बोहरा जी के घर पर दबिश दी और परिवार के लोगों, जिनमें स्त्रियाँ और बच्चे थे, उन्हें डराने और बच्चो को बार-बार थाना ले जाकर प्रताडि़त करने लगे। अंत में हार कर पुलिस प्रशासन ने हीराचंद बोहरा को गिरफ्तार करने के लिए उनके घर की कुर्की के आदेश लिए और घर पर नोटिस चिपका दिया।

कलक्टर ने मीसा के अंतर्गत केंद्रीय कारगार में पहुंचाया

तब घर की कुर्की के आदेश देखते हुए परिवार को पुलिस प्रशासन से प्रताडि़त होते देख राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की योजना के अनुसार पिता हीराचंद बोहरा ने जिला कलक्टर के समक्ष पेश होकर सरेंडर करने का निर्णय लिया। वे कलक्ट्रेट पहुंचे। तब पहले से ही उपस्थित पुलिस अधीक्षक खन्ना अपने सीट से खडे़ हो गए और कहा- यदि आप स्वयं नहीं आते तो हम तो आपको गिरफ्तार ही नहीं कर पाते। इस प्रकार हीराचंद बोहरा को जिला कलक्टर ने मीसा के अंतर्गत केंद्रीय कारगार में पहुंचाया।

-देवराज बोहरा

 



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