प्रवेशोत्सव से स्कूल बुलाने वाली इस सरकारी स्कूल में सीटें फुल बता विद्यार्थियों को लौटाया!

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जोधपुर. एक तरफ तो सरकारी विद्यालयों में प्रवेश के लिए प्रवेशोत्सव मनाकर गांव-गांव में सरकारी विद्यालयों में प्रवेश के लिए रैलियां निकालकर अभिभावकों को जागरूक किया जा रहा है, वहीं प्रवेशोत्सव का एक स्याह पहलू भी सामने आया है। ताजा उदाहरण झालामंड के राजकीय माध्यमिक विद्यालय ढंढ की ढाणी का है, जहां गुरुवार को अपने बच्चों का स्कूल में प्रवेश करवाने आए अभिभावकों को स्कूल प्रबंधन की ओर से सीटें नहीं होने की बात कहकर वापस लौटा दिया गया। अपने लाडलों को प्रवेश दिलाने के लिए अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन के समक्ष मिन्नतें भी की, लेकिन प्रबंधन पर इसका कोई असर नहीं हुआ। वर्तमान सरकार जहां शिक्षा के नाम पर अभियान चलाकर सरकारी विद्यालयों में प्रवेश दिलाने की बात कह रही हो, वहीं स्कूल प्रबंधन का इस तरह का रवैया चौंकाने वाला था। ऐसे में निराश होकर कई अभिभावक निजी स्कूलों की ओर जाते दिखाई दिए।

अभिभावक बोले अब जाना पड़ेगा निजी स्कूल

 

झालामण्ड के राणीजी का थान के रहने वाले इंद्र कुमार ने अपने पुत्र जितेन्द्र प्रजापत के लिए ढण्ढ स्कूल में प्रवेश के लिए आवेदन किया था, लेकिन सीटें नहीं होने का बहाना बनाकर इन्हें स्कूल से वापस लौटा दिया गया। कुमार ने बताया कि सरकारी विद्यालय में प्रवेश नहीं होने से अब उसे मजबूरन जितेन्द्र का प्रवेश निजी विद्यालय में करवाना पड़ेगा। इसी प्रकार से झालामण्ड के ही रहने वाले भंवरलाल अपने दोनों बेटे मनीष व महेन्द्र को कक्षा 9 व 10 में प्रवेश दिलाने के लिए विद्यालय लेकर गए, लेकिन इन्हें भी विद्यालय से सीटें नहीं होने की बात कहकर लौटा दिया गया।

कैसे फैलेगा शिक्षा का उजियारा

 

स्कूल प्रबंधन के इस रवैये से जहां अभिभावकों को निजी स्कूल जाकर मोटी रकम देकर अपने बच्चों का प्रवेश करवाने को मजबूर होना पड़ेगा, वहीं इस घटना ने सरकार व सरकारी अधिकारियों की अपने कर्तव्य के प्रति बरती जा रही लापरवाही की पोल भी खोलकर रख दी। अधिकारियों की इसी लापरवाही की वजह से कई निजी स्कूलों की मनमानी भी बढ़ती जा रही है। क्योंकि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए जिम्मेदार शिक्षा विभाग भी उचित कार्रवाई करने के बजाय मौन ही है।

इनका कहना है

स्थानीय विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या के मुकाबले बैठने की जगह नहीं है। इस वजह से नए विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं दिए जा रहे हैं। साथ ही दसवीं बोर्ड के परिणाम के खराब होने की आशंका को देखते हुए प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।


अमरसिंह देवासी, प्रधानाचार्य, रामा विद्यालय ढण्ढ, झालामण्ड



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