कायदों का हो रहा धुआं, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग कर रहा खानापूर्ति

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- सीएमएचओ ऑफिस से चंद कदम की दूरी पर धड़ल्ले से बिका गुटखा और तंबाकू

जोधपुर . चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से चंद कदमों की दूरी पर नियम कायदे तार-तार होते नजर आए। लेकिन एक भी धूम्रपान करने और गुटखा, सिगरेट व तंबाकू के उत्पाद बेचने वालों पर न तो टीम की नजर गई और न ही उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। ऐसा इसलिए क्योंकि चिकित्सा विभाग इन पर कार्रवाई को लेकर गंभीर नहीं है। धूम्रपान को लेकर सख्ती केवल खानापूर्ति साबित हो रही है। जिसे हर महीने के अंतिम दिन पूरी करने के लिए चिकित्सा विभाग की टीम निकल पड़ती है। इस बार गुरुवार को तंबाकू निषेध दिवस और महीने का अंतिम दिन दोनों एक साथ आए। लगातार कार्रवाई में पिछड़ रहे चिकित्सा विभाग के आंकड़े भी हैरान कर देने वाले हैं। पिछले एक साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो सीएमएचओ की टीम ने केवल 805 दुकानों पर ही कार्रवाई की है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की माने तो इसमें समझाइश के बाद पैनल्टी और उसके बाद सजा का प्रावधान है। लेकिन चौंकाने वाली बात तो यह है कि अभी तक गुटखा और तंबाकू बेचने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई ही नहीं हुई है।

 

समझाइश के दम पर जागरुकता

हर महीने के अंतिम दिन अभियान के नाम पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम केवल समझाइश करके ही वापस लौट आता है। जबकि समझाइश के बाद भी कार्रवाई नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का भी प्रावधान है।

 

कई क्षेत्रों से दूरी
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की विशेष एनसीडी की शाखा हर महीने के अंतिम दिन कार्रवाई करने तो निकलती है। लेकिन कार्रवाई केवल शहरी क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में ही हो रही है। लेकिन टीम के जाने के बाद दुकानदार वापस तंबाकू बेचने लग जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई नजर ही नहीं आ रही।

 

प्रावधान, फिर भी सजा तक नहीं करवा पाए

तंबाकू और गुटखा बेचते पकड़े जाने पर सजा का भी प्रावधान रखा गया है, लेकिन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से किसी को भी सजा नहीं हुई है। मौके पर पकड़े जाने पर ज्यादा ज्यादा केवल चालान बनाकर छोड़ देते हैं

 

समझाइश के बाद करते हैं कार्रवाई

महीने केअंतिम दिन हमारी एनसीडी की टीम कार्रवाई करती है। पहले समझाइश करते हैं। फिर भी बेचता पकड़ा जाते हैं तो उनके चालान बनाने की कार्रवाई करते हैं। हमारे ऑफिस के बाहर टीम समझाइश करके गई थी। पकड़े जाने पर सजा का भी प्रावधान है। लेकिन अभी तक किसी को सजा नहीं हुई है।
डॉ. एसएस चौधरी, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग



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