वजह- बीमा क्लेम की अधिसूचना देरी से जारी होना
किसानों पर भारी लेटलतीफी
जोधपुर. खरीफ सीजन शुरू होने के बावजूद प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है। ऐसे में न तो अब तक बीमा कंपनी को अधिकृत किया है, न ही फ सलों का बीमा हुआ है। राज्य सरकार की लेटलतीफी किसानों पर भारी पड़ रही है। हाल ही चल रही आंधी से किसानों को हुए फ सली नुकसान का किसान क्लेम तक नही कर पाएंगे।
देरी की परम्परा बन गई
सरकार फ सल बीमा योजना का नोटिफि केशन हर वर्ष जुलाई के अंतिम सप्ताह में जारी करती है, जबकि इस सीजन में 31 जुलाई फ सल बीमा लेने की अंतिम तिथि होती है। वर्ष 2016 में 27 जुलाई व 2017 में 22 जुलाई को नोटिफि केशन जारी हुआ था। इस देरी की वजह से किसान बुवाई के बावजूद बीमा क्लेम का आवेदन नहीं कर पाते हैं।
नष्ट हो रहे कपास-मूंगफली
खरीफ सीजन के दौरान शेरगढ़, बालेसर, बाप, फलोदी, ओसिया, लोहावट, तिंवरी आदि क्षेत्रों में कपास की पूरी फ सल व मूंगफ ली की अगेती बुवाई हो चुकी है या चल रही है। गत 5-6 दिनों से तेज आंधी से फ सलें नष्ट हो गई हैं। किसानों की पूंजी इन फ सलों की बिजाई में खर्च हो गई और आंधी से फ सलें नष्ट होने से किसानों के पास दुबारा बुवाई के अतिरिक्त कोई विकल्प नही है। इन फ सलों का अनिवार्य बीमा प्रीमियम कटने के बावजूद फ सल बीमा जोखिम उपलब्ध नहीं हुआ। किसानों को बोई फ सल के नुकसान के अलावा बीमा प्रीमियम व पुन: बुवाई के लिए अतिरिक्त कर्ज का बोझ भी झेलना पड़ेगा।
बंद की जाए योजना
समय पर फ सल बीमा हो, इसके लिए बीमा कंपनी की ओर से कार्यशाला कर किसानों को योजना की जानकारी उपलब्ध कराई जाए। बैंक किसानों से बोई जाने वाली फ सल का घोषणा पत्र लेकर उसके अनुसार प्रीमियम काटे व किसान के मोबाइल पर काटे गए प्रीमियम, रकबे बीमित फ सल व कवर जोखिम राशि का संदेश भेजने के साथ बीमा पॉलिसी उपलब्ध करवाए अन्यथा केवल कंपनियों को लाभ देने के लिए चलाई जाने वाली योजना बंद किया जाए।
तुलछाराम सिंवर, आंदोलन संयोजक, भारतीय किसान संघ, जोधपुर
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