विकास चौधरी/जोधपुर. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद बजरी का अवैध खनन और खुलेआम परिवहन हो रहा है। मिलीभगत का आलम यह है कि अधिकारियों के आदेश के बावजृूद थाने में माफिया के विरुद्ध रिपोर्ट तक दर्ज नहीं हो रही। लूणी थाना पुलिस ने एसीपी के आदेश को हवा में उड़ा दिया और रिपोर्ट दर्ज करने की जगह परिवादी को बजरी माफिया से सुलह-समझाइश की सलाह दे रवाना कर दिया। आखिर पुलिस कमिश्नर के हस्तक्षेप के बाद माफिया के विरुद्ध एफआइआर दर्ज की गई।
खेतानाडी निवासी कुन्दनमल गांधी ने बताया कि उसका खेत कांकाणी तहसील में शिकारपुरा-राजपुरिया रोड पर है। जमीन लूणी नदी के किनारे होने के कारण बजरी की बहुतायत है। बजरी माफिया उसकी जमीन से रात दस से सुबह पांच बजे तक जेसीबी की मदद से बजरी की चोरी कर रहे हैं। हालत यह है कि खेत में कई जगह गहरे गड्ढे हो गए और वहां पेैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। गांधी का कहना है कि बजरी माफिया ने अब तक दो करोड़ रुपए की बजरी चुरा ली है।
एसीपी के आदेश पर भी दर्ज नहीं की एफआइआर
गांधी ने बताया कि उसने लूणी थाने में शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उसने पुलिस कन्ट्रोल रूम पर एसीपी (बोरानाडा) सिमरथाराम को 27 मार्च को लिखित शिकायत दी। एसीपी ने लूणी थाना पुलिस को तुरंत मामला दर्ज करने के आदेश दिए। वह आदेश लेकर थाने पहुंचा तो पुलिसकर्मी उसके साथ खेत पहुंचे व मौका मुआयना किया। वहां बजरी माफिया के ट्रकों के निशान थे। पड़ोसी ने भी पुलिस को बजरी खनन की जानकारी दी। दूसरे दिन वह थानाधिकारी से मिला और खेत की जमाबंदी पेश की। आरोप है कि पुलिस ने एफआइआर दर्ज करने की बजाय बजरी खनन करने वालों से समझाइश करने की बात कहकर उसे टरका दिया। तब वह पुलिस कमिश्नर के समक्ष पेश हुआ और उनके आदेश पर माफिया के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
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